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सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद, शरजील इमाम समेत 6 आरोपियों की जमानत पर बहस सुनी, फैसला सुरक्षित – अगली सुनवाई 6 नवंबर को दोपहर 2 बजे

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समय: 3 नवंबर 2025, शाम 5:53 बजे (IST) – अपडेटेड लाइव कवरेज के आधार पर।मुख्य अपडेट (आज की सुनवाई का सार):आज (3 नवंबर 2025) को सुप्रीम कोर्ट की बेंच – जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया – ने 2020 दिल्ली दंगों के कथित “बड़ी साजिश” मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान और मोहम्मद सलीम खान की जमानत याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई की। यह याचिकाएँ दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2025 के फैसले को चुनौती देती हैं, जिसमें इनकी जमानत खारिज कर दी गई थी।कोर्ट का आदेश: कोर्ट ने दोनों पक्षों (याचिकाकर्ता वकील और दिल्ली पुलिस) की दलीलें सुनने के बाद कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया। मामला 6 नवंबर 2025 को दोपहर 2 बजे के लिए स्थगित कर दिया गया। कोर्ट ने सभी पक्षों को अतिरिक्त दलीलें पेश करने का निर्देश दिया।

आज की सुनवाई के प्रमुख बिंदु:पक्ष
मुख्य दलीलें
याचिकाकर्ताओं के वकील (कपिल सिब्बल – उमर खालिद; अभिषेक मनु सिंघवी – गुलफिशा फातिमा; सिद्धार्थ डेव – शरजील इमाम)
– लंबी हिरासत: सभी आरोपी 5 साल से अधिक समय से जेल में हैं, ट्रायल शुरू ही नहीं हुआ।
– समानता (Parity): देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल तन्हा को पहले जमानत मिल चुकी है; सबूत समान हैं।
– सबूतों की कमी: कोई प्रत्यक्ष हिंसा, हथियार या फंडिंग का प्रमाण नहीं। भाषण गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित थे, न कि उकसावे वाले।
– ट्रायल में देरी: पुलिस ने 3 साल से अधिक समय जांच में लगाया; 90+ बार याचिकाएँ लिस्ट हुईं, लेकिन प्रगति शून्य।
दिल्ली पुलिस (अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू)
– साजिश का आरोप: CAA विरोधी प्रदर्शनों को “सत्ता परिवर्तन” (regime change) के लिए इस्तेमाल करने की योजना।
– सबूत: उमर खालिद को “मेंटर” बताया; शरजील इमाम का “चक्का जाम” मॉडल शाहीन बाग से शुरू होकर दंगों का कारण। डिजिटल सबूत, गवाह बयान और चार्जशीट “अकाट्य”।
– जमानत अस्वीकार: “ये एक दिन की भी रिहाई के लायक नहीं”; ट्रायल में देरी के लिए आरोपी जिम्मेदार।

पृष्ठभूमि:मामला: 2020 उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों (53 मौतें, 200+ घायल) से जुड़ा। UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम), IPC की धाराएँ (जैसे साजिश, दंगा भड़काना) लगीं।
पिछली सुनवाई: 31 अक्टूबर को प्रारंभिक बहस हुई; पुलिस ने हलफनामा दाखिल किया। हाईकोर्ट ने आरोपियों की भूमिका को “गंभीर” बताया था।
महत्व: यह अभिव्यक्ति स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा का संतुलन दर्शाता है। याचिकाकर्ता दावा करते हैं कि भाषण शांतिपूर्ण थे।

यह मामला तेजी से विकसित हो रहा है। अगली सुनवाई पर फैसला संभावित। अधिक अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोत (सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट, लाइव लॉ) देखें।

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