भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को दक्षिण‑पश्चिम मानसून 2026 के लिए अपना दूसरा दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी किया। विभाग ने कहा है कि जून‑सितंबर के अंतराल में देश में सामान्य दीर्घकालिक औसत बारिश का लगभग 90 प्रतिशत होने की संभावनाएं हैं, जिसमें ±4 प्रतिशत का उतार‑चढ़ाव रह सकता है। क्षेत्रीय स्तर पर आईएमडी ने बताया कि लघु‑पुनरावृत्ति अनुमान (LPA) का दायरा 94–106 प्रतिशत तक रहेगा, जिससे समग्र तौर पर मानसून “सामान्य” रहेने का संकेत मिलता है।
आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जून की शुरुआत से ही कई राज्यों में लू की तीव्रता बढ़ने की आशंका है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में सामान्य से अधिक दिनों तक लू चलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी लू की गतिविधि बढ़ सकती है।
जून माह के लिए विभाग ने यह भी कहा कि मानसून की प्रवेश गति कई हिस्सों में धीमी रह सकती है; उत्तर‑पश्चिम भारत, उत्तर‑पूर्व और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में ही सामान्य या उससे अधिक वर्षा देखने को मिल सकती है। साथ ही, पूरे देश में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान है, जिससे गर्मी का दबाव बढ़ेगा।
समुद्री स्थिति का जिक्र करते हुए डॉ. महापात्र ने कहा कि प्रशांत महासागर में मौजूदा न्यूट्रल इंडो‑पैसिफिक परिस्थिति अब अल‑नीनो की ओर बढ़ रही है। जून तक अल‑नीनो सक्रिय होने की संभावना 82 प्रतिशत बताई गई है, जो जुलाई‑अगस्त में 90 प्रतिशत से अधिक हो सकती है — और सामान्यत: अल‑नीनो का प्रभाव भारतीय मानसून को कमजोर कर सकता है। हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की स्थिति इस मौसमी अवधि में न्यूट्रल बनी रहने की उम्मीद है।
आईएमडी ने हालांकि यह भी बताया कि मई में देश भर में सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई और 27 मई तक संचयी मौसमी वर्षा सामान्य से 1 प्रतिशत अधिक रही। विभाग ने यह भी कहा कि दक्षिण‑पश्चिम मानसून ने 16 मई को अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह में समय से चार दिन पहले प्रवेश किया और अब यह दक्षिण अरब सागर व लक्षद्वीप तक पहुंच चुका है; अगले कुछ दिनों में केरल और पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून की सक्रियता बढ़ने की स्थिति अनुकूल है।
अलावे, अगले तीन दिनों में उत्तर‑पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ और पूर्वी हवाओं के प्रभाव से गरज‑चमक, तेज हवाएं और ओलावृष्टि की कुछ घटनाओं का अनुमान है, जिनसे अस्थायी रूप से तापमान में गिरावट और भयंकर गर्मी से राहत मिलने की संभावना है।
आईएमडी ने नागरिकों से गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने, आवश्यकतानुसार पानी अधिक मात्रा में लेने और किसानों तथा संबंधित विभागों को फसल‑सिंचाई तथा मानसूनी तैयारियों में सावधानी बरतने का अनुरोध किया है।




