16 रमज़ार 08 अप्रैल 2023
कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैय्यद सादिक़ हुसैनी शीराज़ी से जारी हेल्प लाइन पर नीचे दिए गये प्रश्नो के उत्तर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी एवं उलेमा के पैनल ने दिए-
लोगों की सुविधा के लिए ‘‘शिया हेल्पलाइन’’ कई वर्षों से धर्म की सेवा कर रही है, इसलिए जिन मुमेनीन को उनके रोज़ा, नमाज़ या किसी अन्य धार्मिक समस्या के बारे में संदेह है, तो वह तमाम मराजए के मुकल्लेदीन के मसाएले शरिया को जानने के लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे आप इन नंबरों 9415580936, 9839097407 पर तक संपर्क कर सकते हैं। एवं ईमेलः उंेंम स786/हउंपसण्बवउ पर संपर्क करें।
नोट- महिलाओं के लिए हेल्प लाइन शुरू की गयी है जिस मे महिलाओं के प्रश्नों के उत्तर खातून आलेमा देेगीं इस लिए महिलाओं इस न0 पर संपर्क करें। न0 6386897124
प्रश्न- यदि कोई रोज़दार जानबूझकर अल्लाह, पैगंबर, या अहल अलबैत से कोई झूठी हदीस मंसूब करने के बाद तुरंत कहता है, मैंने गलत कहा है और अपने शब्दों को वापक ले तो क्या उसका रोज़ा सही है?
जवाब-उसके लिए रोज़ सही नहीं है, रोज़े की क़ज़ा करना ज़रूरी है।
सवाल- क्या मृतक माता-पिता की तरफ से शब कद्र आमाल किया जा सकता है?
जवाबरू- शब अल-कद्र में इंसान रात भर जागता है, इसमें मरहूम मां-बाप के किए आमालं को अंजाम देना बेहतर है।
प्रश्नः कुरान की किस सूरह में हिजाब के आदेश का उल्लेख है?
जवाब- हिजाब का हुक्म पवित्र कुरान के 24वीं सूरह, सूरहए नूर, आयत न0 31में दिया गया है।
सवाल-शब कद्र की 100 रकात नमाज़ में माता-पिता की कज़ा नमाज़ पढ़ी जा सकती है?
उत्तर- माता-पिता कज़ा नामाज़ को अदा किया जा सकता है।
सवाल- क्या क़ज़ा की नमाज़ जमाअत में पढ़ी जा सकती है?
जवाब- क़ज़ा नमाज़ जमाअत में पढ़ी जा सकती है।





