जबलपुर, 11 मार्च 2026: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब एक व्यक्ति ने पॉलिथीन में शिशु का भ्रूण लेकर कोर्ट रूम में प्रवेश कर दिया। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ के समक्ष पेश हुए रामस्वरूप पटेल (उम्र 32 वर्ष, निवासी भोपाल) ने आरोप लगाया कि सड़क हादसे में उसकी गर्भवती पत्नी सीमा पटेल (उम्र 28 वर्ष) का गर्भपात हो गया, लेकिन स्थानीय पुलिस ने आरोपी ड्राइवर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसी के चलते वह भ्रूण को सबूत के रूप में लेकर हाईकोर्ट पहुंचा।घटना का पूरा विवरणकोर्ट की सुनवाई के दौरान रामस्वरूप पटेल ने न्यायमूर्ति के सामने पॉलिथीन खोलकर भ्रूण दिखाया और रो-रोकर अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि 5 मार्च 2026 को भोपाल के ट्रेंड मैदान इलाके में एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी, जिसमें पत्नी सीमा को गंभीर चोटें आईं। अस्पताल में इलाज के दौरान 7 महीने का भ्रूण मृत पैदा हुआ। पटेल ने दावा किया कि ट्रक चालक महेश शर्मा (ट्रांसपोर्टर, निवासी इंदौर) ने मौके से भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने केवल नोटिस जारी कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। FIR दर्ज करने और चालान की मांग को लेकर TT नगर थाने में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।कोर्ट रूम में हंगामा और त्वरित कार्रवाईभ्रूण दिखाते ही कोर्ट रूम में सनसनी फैल गई; जज ने तुरंत सुनवाई स्थगित कर दी।सुरक्षा कर्मियों ने रामस्वरूप को नियंत्रित किया और पॉलिथीन को कब्जे में ले लिया, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया।न्यायमूर्ति जोशी ने पुलिस को नोटिस जारी कर 48 घंटे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी और मामले को PIL के रूप में दर्ज किया।कोर्ट ने अस्थायी आदेश दिया कि TT Nagar पुलिस ट्रक चालक महेश शर्मा के खिलाफ IPC 304A (लापरवाही से मौत), 337 (चोट पहुंचाना) के तहत FIR दर्ज करे।पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रियाभोपाल पुलिस आयुक्त ने कहा, “मामले की जांच चल रही थी, लेकिन अब कोर्ट निर्देश पर तत्काल कार्रवाई होगी।” ट्रक मालिक ने सफाई दी कि हादसा पटेल की लापरवाही से हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने भ्रूण को मेडिकल वेस्ट के रूप में सुरक्षित रखने का आदेश दिया। यह घटना न्यायिक प्रक्रिया में सबूत पेश करने की असामान्य परंपरा को उजागर करती है।सामाजिक प्रभावयह मामला पुलिस सुस्ती और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठा रहा है। रामस्वरूप की पत्नी सीमा अभी अस्पताल में हैं। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप अपेक्षित है, जो पुलिस जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। सोशल मीडिया पर
भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंचा व्यक्ति: पुलिस पर गर्भपात मामले में कार्रवाई न करने का आरोप, मचा हड़कंप





