हुसैन की अज़मत को रसूल खुदा ने यूँ ब्यान कर लोगों को बताया कि मेरा हुसैन ज़मीन की ज़ीनत है और आसमानों की भी ज़ीनत है मौलाना सय्यद कलबे जवाद नक़वी आज यहां मर्केज़े अज़ादारी राजधानी लखनऊ के पुराने शहर चौक में स्थित गुफरामआब में मुहर्रम की दूसरी मजलिस को खिताब कर रहे थे।
मौलाना ने कहा दौराने जुमा रसूल अलिहिसस्लाम खुतबा दे रहे थे कि इतने में ईमाम हुसैन मस्जिद में आगये और उनका पैर अबा में उलझ गया बस रसूल खुदा ने खुतबा छोड़ा और हुसैन को गोद में उठा कर ज़ानू पर बिठाया और हुसैन के फज़ाइल बयान करना शुरू कर दिए लोगों को खिताब करते हुए रसूल इस्लाम ने बताया देखो यह हुसैन है मेरा हुसैन ज़मीन की ज़ीनत है और आसमानों की भी ज़ीनत है मेरा हुसैन कश्ती ए नजात है मेरा हुसैन हिदायत का रौशन चराग है मिसाल देते हुए कहा कि रसूल खुदा ने सूरज की मिसाल क्यों नहीं दी? चाँद की मिसाल क्यों नहीं दी जबकि सूरज और चाँद की रौशनी चराग़ से बहुत ज़ियादा होती है जानते हैं कि चराग़ की मिसाल इस लिए दी,कि एक चराग़ से आप सैकड़ों चराग़ जला सकते है इस लिए रौशन चराग़ कहा,कश्ती की मिसाल देते समझाया,अगर ऊंट या घोड़े की मिसाल रसूल खुदा देते तो इंसान गिरने के बाद थोड़ी बहुत चोट लग जाती और गिरने वाला फिर अपनी मंज़िल तक पहुँच जाता लेकिन रसूल ए खुदा ने कश्ती की मिसाल दी कि इस से गिरने के बाद बचने का कोई रास्ता ही नहीं है सीधे सीधे डूब ही जाओगे।
मौलाना ने कहा आज बर्रे सगीर (एशिया) में जितने भी बड़े बड़े आलिम गुज़रे हैं वो सब खानदाने इजतेहाद के ही शागिर्द हैं चाहे वो गुफरामआब के रहे हों चाहे सुल्तानुल उलमा के या फिर सय्यदुल उलमा के,
मौलाना ने क़ाफ़ले के मदीने से चल कर दो मुहर्रम पर कर्बला पहुँचने और कर्बला में पानी बंद होने पर मसायब ब्यान किये जिस पर आज़ादार दहाड़े मार मार कर अपने आँसूओं से ईमाम को पुरसा पेश करने लगे





