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शिया हेल्पलाइन पर मौलाना सैफ अब्बास से सवाल एवं जवाब

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लखनऊ 29 रमजान (19 मार्च 2026) को आयतुल्लाह अल उज़मा सैयद सादिक़ हुसैनी शिराज़ी के कार्यालय से जारी शिया हेल्पलाइन पर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी ने ईद-उल-फित्र से जुड़े सवालों के जवाब दिए। यह जानकारी शिया मुसलमानों के लिए रमज़ान के आखिरी दिन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चंद्रमा के आधार पर ईद की तारीख तय करता है। महिलाओं के लिए अलग हेल्पलाइन नंबर 6386897124 पर खातून आलमा जवाब देंगी।ईद के आवश्यक कामईद के दिन सुबह की नमाज़ के बाद तकबीरात पढ़ें, फितरा दें, अच्छे कपड़े पहनें, खुशबू लगाएँ, नमाज़ से पहले मीठी चीज़ खाएँ, जियारत इमाम हुसैन (अ.स.) और दुआ-ए-नुदबा पढ़ें। ये काम वाजिब या सुन्नत हैं ताकि ईद पूर्ण रूप से अदा हो। अधिक तफ़सील के लिए शरई किताबें देखें। ��फितरा देने में देरीफितरा निकालने के बाद देरी करना गुनाह है, क्योंकि हुक्म है कि गरीब को तुरंत दें ताकि वह भी ईद मना सके। बेहतर है यतीमों, मिस्कीनों या यतीमखानों को दें। इससे फितरा देने वाले का अमल पूरा होता है। �फितरे में अलग-अलग चीज़ेंहाँ, हर व्यक्ति अपनी तरफ से अलग चीज़ दे सकता है—जैसे पिता पैसे, बेटा गेहूँ, माँ खजूर। फितरे की शक्ल में एक-एक फितरा देना ही चाहिए, कोई हर्ज नहीं। यह लचीलापन शरई नियमों में जायज़ है। �पत्नी की कफालत में फितरायदि पत्नी घर की कफालत करती है, तो पति और बच्चों का फितरा उसके ऊपर वाजिब है। यह शिया फिक़्ह के अनुसार कफील (परवरिश करने वाले) की ज़िम्मेदारी है। �मन्कूहा का फितरारुखसती से पहले मन्कूहा (निकाह हो चुकी लड़की) अभी पिता की कफालत में हो तो फितरा पिता अदा करेगा, पति पर वाजिब नहीं। रुखसती के बाद पति की ज़िम्मेदारी बनती है। �संपर्क जानकारीपुरुषों के लिए सुबह 10-12 बजे तक नंबर: 9415580936, 9839097407। ईमेल: masael786@gmail.com। यह हेल्पलाइन सभी मराज़े के मुकल्लिदीन के लिए है। पुरानी रिपोर्टों में भी यही नंबर शिया हेल्पलाइन के तौर पर उल्लेखित हैं। �

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