इमाम हुसैन की यौमे पैदाइश सबको मुबारक हो
इमाम हुसैन का जन्म
3 शबान को मनाया जाता है।
इमाम हुसैन, इमाम अली के पुत्र और पैगंबर मुहम्मद के नाती थे।
उनके भाई का नाम इमाम हसन था।
पैगंबर मुहम्मद ने उनके बारे में कहा,
‘वे मेरी आंखों की ठंडक हैं।’
जैसा कि सभी जानते हैं, जब इमाम हसन और इमाम हुसैन पैगंबर मोहम्मद की नमाज के दौरान सजदे में पीठ पर बैठ गए थे, तो उन्होंने उन्हें उतरने को नहीं कहा, बल्कि अपने सजदे को बढ़ा दिया।
मुबाहिला के दौरान, पैगंबर मुहम्मद ने इमाम हुसैन को अपनी गोद में और इमाम हसन को अपने हाथ से पकड़ कर ले गए ।
दुश्मन हैरान होकर कह रहे थे,
‘ये कौन लोग हैं?
अगर ये किसी पहाड़ को आदेश दें,
तो वह रेत में बदल जाएगा।’
मैंने सुना है कि पैगंबर मुहम्मद ने कहा,
‘जन्नत में हसन और हुसैन जवानों के सरदार होंगे।’ कुछ मुसलमान पैगंबर मुहम्मद के बाल और कपड़े, इमाम अली के हाथ से लिखा हुआ कुरान,
इमाम हसन- हुसैन के कपड़ों को पवित्र अवशेष मानते बड़ी मोहब्बत से अपने पास रखे हुए हैं, ओर उनकी जियारत/ दर्शन करते हैं, ऐसा ही कुरान में दर्ज है।
ताबूत-ए-सकीना,
जिसे फरिश्ते अपने कंधों पर ले होंगे,
जो मानवता के लिए आशीर्वाद लेकर आया है। जब पूछा गया कि इसमें क्या है,
तो पैगंबर मुहम्मद ने बताया कि इसमें इब्राहिम का कुर्ता है,
जो यूसुफ ने याकूब की आंखों की रोशनी वापस लाने के लिए भेजा था,
मूसा का असा और सुलेमान की अंगूठी है,
जैसा कि कुरान में और इसका विश्लेषण तफसीले कुरान में लिखा है ।
इस शुभ अवसर पर, आइए हम अपने रब से प्रार्थना करें पैगंबर मुहम्मद के परिवार के नाम पर हमें मानवता की स्थापना के लिए प्रयास करें।
शाबू ज़ैदी
आशिक़े आले मुहम्मद




