10 रमजान 21 मार्च 2024
कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैय्यद सादिक़ हुसैनी शीराज़ी से जारी हेल्प लाइन पर नीचे दिए गये प्रश्नो के उत्तर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी एवं उलेमा के पैनल ने दिए-
लोगों की सुविधा के लिए ‘‘शिया हेल्पलाइन’’ कई वर्षों से धर्म की सेवा कर रही है, इसलिए जिन मुमेनीन को उनके रोज़ा, नमाज़ या किसी अन्य धार्मिक समस्या के बारे में संदेह है, तो वह तमाम मराजए के मुकल्लेदीन के मसाएले शरिया को जानने के लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे आप इन नंबरों 9415580936, 9839097407 पर तक संपर्क कर सकते हैं। एवं ईमेलः उंेंम स786/हउंपसण्बवउ पर संपर्क करें।
नोट- महिलाओं के लिए हेल्प लाइन शुरू की गयी है जिस मे महिलाओं के प्रश्नों के उत्तर खातून आलेमा देेगीं इस लिए महिलाओं इस न0 पर संपर्क करें। न0 6386897124
प्र0-यदि कोई व्यक्ति रमज़ान के दरमियान में इस्लाम लाता है, तो क्या उसे पिछले रोज़े रखने होंगे?
जवाब- इस्लाम में आने के बाद शरीयत का हुक्म लागू होगा, इसलिए वह पिछला रोजा नहीं रखेगा।
प्र0- क्या रोजेदार अजान मगरिब शुरू होते ही अपना रोजा इफतार कर सकता है?
उ0-अगर रोजेदार को यकीन हो जाए कि मगरिब का समय दाखिल हो चुका है तो वह अपना रोजा इफतार कऱ सकता है।
प्र0-एतिकाफ में रहने की कितनी शर्तें हैं?
उ0-एतिकाफ में रहने के लिए कुछ शर्तें हैं। ईमान, अक्ल, कुरबत की नियत,रोजा रखना तीन दिन से कम ना हो.
प्र0-अगर कोई शख्स कर्ज में डूबा हो तो क्या उसे जकात दी जा सकती है?
उ0-जो शख्स पूरे साल अपना खर्च ना रखता हो और कर्ज में डूबा हो, वह जकात ले सकता है।
प्र0- ट्रेनों में अकसर मोकों पर पता ही नहीं चलता कि किबला किस तरफ है, ऐसे में क्या टॉयलेट जाना सही रहेगा?
उ0-ऐहतयात बेहतर है या अपने पास किबला नुमा रखें।





