वाशिंगटन/तेल अवीव, 29 अप्रैल 2026: इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने इजरायल की प्रमुख खुफिया एजेंसी मोसाद के एक विवादास्पद प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। मोसाद का यह प्लान ईरान की सत्ता को उखाड़ फेंकने और इजरायल समर्थक नई सरकार स्थापित करने पर केंद्रित था, जिसमें ईरानी कुर्द विद्रोहियों को हथियारबंद समर्थन देकर देश के अंदर घुसपैठ कराने और बड़े पैमाने पर आंतरिक विद्रोह भड़काने की योजना शामिल थी।
मोसाद का कथित ‘रेजिम चेंज’ प्लान
इजरायली अखबार येदियोत अहरोनोत और हारेत्ज जैसे प्रमुख मीडिया हाउसेज की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मोसाद ने हाल ही में अमेरिकी प्रशासन के सामने एक गुप्त प्रस्ताव रखा था। इस प्लान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:
शीर्ष नेतृत्व की हत्या: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, राष्ट्रपति एब्राहिम रईसी और अन्य प्रमुख सैन्य व धार्मिक नेताओं को लक्षित कर लक्षित हत्याएं (टारगेटेड असैसिनेशन्स) अंजाम देना।
कुर्द विद्रोहियों को समर्थन: ईरान के उत्तर-पश्चिमी कुर्द बहुल इलाकों में सक्रिय अलगाववादी गुटों, जैसे पीजेके (पार्टी ऑफ फ्री लाइफ ऑफ कुर्दिस्तान) को हथियार, ट्रेनिंग और लॉजिस्टिकल सपोर्ट प्रदान करना। इन्हें सीमा पार करके तेहरान के खिलाफ गुरिल्ला हमले करने के लिए उकसाना।
आंतरिक अशांति का फायदा: ईरान में हाल के महीनों में महंगाई, बेरोजगारी और महिलाओं के हिजाब विरोधी प्रदर्शनों (जैसे महसा अमिनी मामले से प्रेरित) का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर सशस्त्र विद्रोह भड़काना। प्लान में सोशल मीडिया कैंपेन, साइबर अटैक और प्रॉक्सी मिलिशिया के जरिए अराजकता फैलाने की बात कही गई थी।
नई सरकार की स्थापना: पुरानी इस्लामी गणराज्य व्यवस्था को ध्वस्त कर इजरायल-अमेरिका समर्थक एक धर्मनिरपेक्ष या उदारवादी सरकार लगाना, जो मध्य पूर्व में इजरायल की सुरक्षा को प्राथमिकता दे।
मोसाद के इस प्रस्ताव को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का आधिकारिक समर्थन प्राप्त था, जो ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और क्षेत्रीय प्रभाव को कम करने के लिए आक्रामक रणनीति पर जोर दे रही है।
वेंस की कड़ी प्रतिक्रिया
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने व्हाइट हाउस में आयोजित एक गुप्त बैठक में इस प्रस्ताव को “अत्यधिक जोखिम भरा और अनावश्यक साहसिक” बताते हुए ठुकरा दिया। सूत्रों के अनुसार, वेंस ने कहा, “हम रेजिम चेंज के जाल में फंसकर मध्य पूर्व को और अस्थिर नहीं करेंगे। इससे ISIS जैसे चरमपंथी समूहों को फायदा पहुंचेगा और अमेरिकी हितों को खतरा होगा।”
वेंस का यह रुख राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के अनुरूप माना जा रहा है, जो विदेशी सैन्य साहसिक कार्रवाइयों से बचते हुए डिप्लोमेसी और आर्थिक प्रतिबंधों पर जोर देती है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वेंस ने मोसाद को चेतावनी दी कि बिना अमेरिकी सहमति के ऐसी कार्रवाई करने पर इजरायल को सैन्य और खुफिया सहायता में कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
क्षेत्रीय प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
यह खबर मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकती है। ईरान ने पहले ही इजरायल पर कुर्द क्षेत्रों में गुप्त हस्तक्षेप का आरोप लगाया है, जबकि तुर्की जैसे कुर्द-विरोधी देश इस प्लान से सतर्क हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने भी मोसाद के प्रस्ताव पर ‘गंभीर चिंता’ जताई है, क्योंकि इससे ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम और तेजी से आगे बढ़ सकता है।
इजरायली मीडिया ने इसे “रणनीतिक झटका” करार दिया है, लेकिन अमेरिकी विशेषज्ञों का मानना है कि वेंस का फैसला युद्ध की बजाय शांति की दिशा में सकारात्मक कदम है। फिलहाल, न तो व्हाइट हाउस और न ही मोसाद ने इन रिपोर्ट्स की आधिकारिक पुष्टि की है।



