प्रयागराज, 30 अप्रैल 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और बागपत प्रशासन पर बड़ा प्रहार करते हुए 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने यह राशि याचिकाकर्ता मोहम्मद चांद को तत्काल देने का आदेश दिया। मामला बागपत जिले में 18 अक्टूबर 2024 को हुई एक घटना से जुड़ा है, जिसमें स्थानीय पुलिस ने चांद के वाहन को प्रतिबंधित मांस ले जाने के शक में जब्त कर लिया था।
घटना का पूरा विवरण: बागपत पुलिस ने रूटीन चेकिंग के दौरान मोहम्मद चांद का वाहन रोका। शक के आधार पर वाहन जब्त कर लिया गया और नमूने पशु चिकित्सक को भेजे गए। रिपोर्ट में मांस को गोमांस नहीं, बल्कि संदिग्ध बताया गया। इसके बावजूद बागपत के डीएम ने 16 जून 2025 को वाहन को स्थायी रूप से जब्त करने का आदेश जारी कर दिया। फोरेंसिक लैब की अंतिम रिपोर्ट अभी तक नहीं आई थी।
याचिका और कोर्ट की सुनवाई: मोहम्मद चांद ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में कहा गया कि बिना ठोस सबूत (फोरेंसिक रिपोर्ट) के वाहन जब्ती उनकी आजीविका पर सीधा प्रहार है। चांद का यह वाहन उनकी कमाई का मुख्य साधन था, जिससे वे परिवार चलाते थे। कोर्ट ने तर्कों को सही ठहराते हुए डीएम का आदेश पूरी तरह रद्द कर दिया।
कोर्ट के मुख्य निर्देश:
यूपी सरकार 2 लाख रुपये जुर्माना चुकाए, जो चांद को हर्जाना के रूप में मिलेगा।
जब्त वाहन तुरंत रिलीज करें, बिना किसी शर्त के।
भविष्य में ऐसी कार्रवाई से पहले फोरेंसिक रिपोर्ट अनिवार्य हो।
प्रशासन को चांद को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने को कहा।
प्रकाश नाथ के लिए विशेष नोट: यदि आप प्रकाश नाथ हैं और इस मामले से जुड़े (जैसे वकील, परिवार या सलाहकार), तो यह फैसला मिसाल है। बिना सबूत के जब्ती अवैध है। जुर्माना 7 दिनों में जमा करें, वरना contempt का खतरा। चांद को वाहन मिलने से उनकी वेडिंग/व्यापार योजनाएं पटरी पर लौटेंगी। सलाह: फोरेंसिक रिपोर्ट की कॉपी लें और आगे केस के लिए तैयार रहें।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला यूपी में मांस परिवहन से जुड़े मामलों में नई मिसाल कायम करेगा। पुलिस और प्रशासन को अब शक के आधार पर कार्रवाई करने से पहले वैज्ञानिक सबूत जुटाने होंगे। बागपत एसपी ने कहा कि वे कोर्ट आदेश का पालन करेंगे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यूपी सरकार पर करारा प्रहार: बागपत DM का आदेश रद्द, 2 लाख जुर्माना चुकाकर मोहम्मद चांद को लौटाएं वाहन





