समाज में सौहार्द की फुहार बिखेरने की परंपरा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर निभाई है। भाजपा विधायक श्रीमती अनुपमा जायसवाल के स्वास्थ्य लाभ के लिए मेदांता अस्पताल पहुंचकर उन्होंने न सिर्फ शुभकामनाएं दीं, बल्कि राजनीति के मैदान से इतर मानवीय संबंधों की मिसाल भी कायम की। उनके सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “हम नहीं चाहते हैं कि समाज के बीच आग जले। हम चाहते हैं समाज में सौहार्द की फुहार हो। राजनीति अपनी जगह है और मानवीय संबंधों का महत्व अपनी जगह। सद्भाव बना रहे, सौहार्द बना रहे!”
यह घटना तब और खास हो जाती है जब याद आता है कि समाजवादी पार्टी ने महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पास न होने के विरोध में प्रदर्शन किया था, जिसमें विधायक जी के पुतले भी जलाए गए थे। फिर भी, अखिलेश यादव ने राजनीतिक मतभेद को अलग रखकर इंसानियत का परिचय दिया। यह ठीक वैसा ही है, जैसा भारत रत्न धरतीपुत्र स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव सिखाते थे – “किसी भी राजनीतिक पार्टी के नेता से हमारा राजनीतिक मतभेद हो सकता है, लेकिन व्यक्तिगत मतभेद नहीं!”
मुलायम जी के मुख्यमंत्री काल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी, भाजपा के पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय कल्याण सिंह और स्वर्गीय लालजी टंडन जैसे नेताओं से उनके व्यक्तिगत संबंध गहरे थे। वे हमेशा विशेष ध्यान देते थे। अखिलेश यादव ने आज उसी सिद्धांत पर चलते हुए साबित कर दिया कि राजनीति विचारों और नीतियों की लड़ाई है, न कि व्यक्तिगत दुश्मनी की। समाज को ऐसी सकारात्मक राजनीति की सख्त जरूरत है, जहां वैचारिक भिन्नता हो, लेकिन स्नेह और सम्मान बना रहे। अखिलेश जी का यह कदम समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा है!
राजनीतिक वैर से परे मानवीय सौहार्द की मिसाल




