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अहलेबैत की तालीमात हम तक पहुंचने में हमारे बुज़ुर्गों और आलिमों ने क्या-क्या कुर्बानी पेश की: मौलाना कल्बे जावाद

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आज मुहर्रम की दूसरी मजलिस को ख़ताम फरमाते हुए मौलाना कल्बे जवाद साहब ने बयान किया के…

हमारी क़ौम के बच्चों, नौजवानों को ये मालूम होना चाहिए कि अहलेबैत की तालीमात हम तक पहुंचने में हमारे बुज़ुर्गों और आलिमों ने क्या-क्या कुर्बानी पेश की।
इसका मक़सद ये है कि इसे हमारे बच्चों को शौक (प्रेरणा) दिया जाता है कि किन किन हालातों से गुजर केर हम तक आज़ादी और तालीमते अहलेबैत पाहुंचे।
हमारे ज़माने में न रेडियो था, न इंटरनेट था, न बेहतर सवारी थी।
उसके बाद भी 200 साल पहले आयतुल्लाह गुफ़रानमाब पेडल समंदर तक पहुंचें और वहां से कश्ती के ज़रिये समंदर का रास्ता तय करें केर के इराक पहुंचें और तालीम हासिल की।

????????जितने भी आलिम गुज़रे हैं वो तो आयतुल्लाह गुफ़रानमाब के शागिर्द रहे हैं या उनकी औलादों के शागिर्द रहे हैं।

????????जितने भी खानवादों में इल्म का चिराग़ जल रहा है उसमें रोशनी है या तो जनाबे गुफ़रानमाब के ज़रिये पहुँची है या सुल्तानुल उलेमा के ज़रिये पहुँची है।

????????कहा जाता है कि अवध में शिया बादशाह रहे हैं इसलिए यहां आजादी दूसरी कौमों में आ गई..
ये बिल्कुल गलत है बादशाहों के ज़रिये अज़ादारी नहीं फैली है..इमाम हुसैन कुर्बानी का असर है जिसकी ज़रिये अज़ादारी फैली है।

????????इंदौर में कब शिया हाकिम रहा,ग्वालियर में कब शिया हाकिम रहा,झांसी में कब शिया हाकिम रहा,बनारस में कब शिया हाकिम रहा ना जाने कितनी ऐसी जगह है जहां हिंदू राजा ने आजादी के लिए रकम वक्फ केर रखी है और राजा के नाम से ताजिए उठते हैं और राजा खुद अपने सर पर ताजिया रख कर नंगे जोड़े कर्बला तक जाता है।
वहां कौन और शिया हुकूमत थी.

????????झाँसी शहर में झाँसी की रानी के महल के अंदर से 5 मुहर्रम को झाँसी की रानी का ताज़िया उठता है और आज भी डीएम साहब इंतेज़ाम करते हैं ताज़िया उठाने का।

????????ये इमाम हुसैन की तौहीन है और बादशाह पैसा देते हैं अज़ादारी के लिए ये इमाम हुसैन की कुर्बानी है जो उसकी क़ौम अज़ादारी और ताजियादारी करते थे और आज भी हो रही है।ये कुर्बानी हुसैन की तौहीन है।

????????लेकिन एक शर्त है कि जिसकी मजलिस में तुम शरीक हो रहे हो, उसकी मारफत रखते हो।
????????मशहुर रवी फरमाते हैं एक मरतबा रसूल अल्लाह स्व मस्जिद में खुतबा दे रहे थे और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम तसरीफ लाए रसूल अल्लाह ने खुतबे को रोकते हुए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की तरफ बढ़े और कहा ..मरहबा मरहबा ए हुसैन जैसे तुम जमीन की भी ज़ीनत हो सोना आसमान की भी ज़ीनत हो।

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