Home / धर्म चर्चा / अंजुमन के नौ-मुंतख़ब मेम्बर -11

अंजुमन के नौ-मुंतख़ब मेम्बर -11

Spread the love

अंजुमन वज़ीफ़ा ए सादात व मोमिनीन एक जम्हूरी इदारा है इसकी आला गवर्निंग बॉडी इसकी कारकुन कमेटी है। अंजुमन का एक दस्तूर उल अमल है और उम्मीद की जाती है कि इसके तमाम ओहदेदारान और मिम्बरान तमाम उमूर अंजाम देते वक़्त ऐसा कोई काम अंजाम नहीं देंगे जो दस्तूर उल अमल के ख़िलाफ़ हो या मेल ना खाता हो।
कारकुन कमेटी में कुछ टेम्परेरी और कुछ पॉर्मनेंट (मनसबी) मिम्बरान होते हैं। टेम्परेरी मिम्बरान जिन्हें इलेक्टेड मिम्बरान भी कहा जाता है, दस्तूर ए अमल के कुछ प्रोविज़न के तहत एक अरसे के ये मिम्बरान भी मनसबी मिम्बरान बन जाते हैं।
इलेक्टेड मिम्बरान तीन साल के लिए चुने जाते हैं। 2022-25 के लिए पहले मरहले में आम चुनाव के ज़रिए 15 मिम्बरान चुन लिए गए हैं। अभी कई मरहले हैं जिसमें मज़ीद 7 मिम्बरान का इलेक्शन किया जाना बाक़ी है।
इस मर्तबा आम इलेक्शन में तक़रीबन ढाई हज़ार वोटर्स ने अपने वोट के हक़ का इस्तेमाल किया जो एक रिकार्ड है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि सद फ़ी सद मिम्बरान वोट कर सकें। जो रिज़ल्ट आया है उस से सभी साफ़ ज़ाहिर है कि मिम्बरान इस क़दीमी इदारे के हालात में तब्दीली और एक नयी डायनामिक्स के ख़्वाहाँ हैं।
हमने एक सिलसिला शुरू किया है कि नौ-मुनतख़ब (newly elected) मेम्बरान का क़ौम के सामने एक तार्रूफ़ पेश किया जाए।हमारी यह छोटी सी कोशिश को काफ़ी मक़बूलियत मिल रही है। दो रोज़ क़बल एक तक़रीब में कुछ ज़ी-फ़हम अफ़राद से मुलाक़ात हुई तो उन्होंने कहा भी “मशाल्लाह इस मर्तबा मुस्तौजूब और मुस्तहक़ अफ़राद का इंतिख़ाब हुआ है।” अभी तक हम दस नौ-मुनतख़ब मिम्बरान से आप हज़रात को मुतार्रिफ़ करा चुके हैं, इस तरह अंजुमन और अवाम के दरमियान एक रबत और पुल क़ायम होने का काम भी ख़ुद बख़ुद हो रहा है।
गुज़श्ता सालाना जलसे में कारकुन कमेटी में एक तजवीज़ पर ग़ौर हुआ कि कमेटी में मस्तूरात की नुमाइंदगी को भी यक़ीनी बनाया जाए। जब इस इशू पर एक राय बन गयी तो हमने रज़ा हैदर, ज़मानत अली, ऐनुर रज़ा के साथ जनाब हादी हसन ज़ैदी साहब से तबादलाये ख़याल किया। इस सिलसिले में हमने दो ख़वातीन को नॉमिनेट करने का फ़ैसला लिया। पहली हैं मोहतरमा रज़िया फ़ातिमा रिज़वी दूसरी हैं सैयदा नसीम सुबही। इन दोनों ख़वातीन ने अंजुमन की तारीख़ में नया बॉब खोला है।
——
2022-25 के आम इलेक्शन में मुंबई की लोकल सेक्रेटेरी मोहतरमा रज़िया फ़ातिमा रिज़वी ने ग्यारवीं पोज़ीशन हासिल की है। आपका तालुक़ अदब के शहर लखनऊ से है, क्योंकि आपकी परवरिश और ग्रैजूएशन तक तालीम लखनऊ में हुई।इसके बाद आपकी शादी मुंबई में हो गयी लेकिन ज़ाहिर है कि आपका रिश्ता लखनऊ से बरक़रार रहा। मुंबई में आप परिवार की देखभाल और बच्चियों की परवरिश में मशग़ूल हो गयीं, लेकिन 2004 से आप ने कार ए ख़ैर की तरफ़ अपनी तवज्जोह देना शुरू किया। पहले आप मज़हबी इदारों से मुतामस्सिक हुईं जैसे कि दर ए ज़ैनब,, बेहशत ए ज़ैनब, बीबी ख़दीजा अकादमी वग़ैरा। आपने अपनी बच्चियों की तालीम की तरफ़ ख़ास ध्यान दिया, आपकी एक बेटी सी॰ए॰ है तो दूसरी बेटी एक कालेज में केमिस्ट्री की हेड आफ़ द डिपार्टमेंट है।
मोहतरमा रज़िया फ़ातिमा रिज़वी ने ग़रीब बच्चों की तालीम और माली तौर पर कमज़ोर घरों की लड़कियों की शादी के इंतज़ामात के हवाले से काफ़ी काम किया है। इस जानिब मुनज़्ज़म तरीक़े से काम करने के लिये ज़रूरी था कि कोई इदारा क़ायम किया जाए तो आपने ने 2006 में “सकीना असोसीएशन” के नाम से एक इदारा क़ायम किया जिसके तहत तालीम, शादी, बीमारी में माली और दीगर तरीक़ों से क़ौम के कमज़ोर तबक़े की मदद का रास्ता खोला गया। यह इदारा हर तरह की इमदाद के साथ-साथ क़ौम की बच्चियों में तालीम को लेकर मज़ीद बेदारी पैदा करने के लिये हर साल अवार्ड और इनामात तक़सीम करती है। मोहतरमा रज़िया फ़ातिमा रिज़वी का मानना है कि बेहतर तालीम से ही क़ौम तरक़्क़ी की जानिब गामज़न हो सकती है।
2010 में मोहतरमा रज़िया फ़ातिमा रिज़वी की बड़ी बेटी ने जब सी॰ए॰ मुकम्मल किया तो जनाब हादी ज़ैदी साहब की तशवीक़ पर उनकी बेटी अंजुमन की मेम्बर बनी। इसके बाद रज़िया फ़ातिमा साहिबा ने सोचा कि वह ख़ुद क्यों ना अंजुमन के ज़रिए क़ौम की ख़िदमात करें तो वह बाक़ायदा तौर पर अंजुमन से मुंसलिक हो गयीं, और मुंबई से अंजुमन की बतौर लोकल सेक्रेटेरी काम करने लगीं। आप ख़ुद मोहसिन ए अंजुमन हैं और आप ने मुतादिद लोगों को अंजुमन का दवामी, लाइफ़ और मोहसिन ए अंजुमन बनाया है। आप के जज़्बे और खुलूस का नतीजा है कि क़ौम के लगभग तमाम इदारों की ख़्वाहिश है कि आप उनके इदारों से मुंसलिक हो जाएँ। आपकी मसरूफ़ियात और शायद सेहत इस बारे में माने’ है।
रज़िया फ़ातिमा रिज़वी साहिबा को इमाम ए मज़लूम (अ) से ख़ास अक़िदत है और यही वजह है कि आप ने तीन बार पापियादा अरबायीन के दौरान इमाम के रौज़े पर हाज़िरी दी है, उनकी दिली तमन्ना है कि वह बारहा यह अमल अंजाम देती रहें।
आप ने एक ख़ास दुआ की अपील की है कि ख़ुदा वंद करीम उनको सेहत, हौसला और तौफ़ीक़ अता करे कि वह जज़्बा ए ख़िदमत ए ख़लक़ से कभी ख़ुद को महरूम ना समझें।
अंजुमन से उनकी वाबस्तगी का एक नया तारीख़ी दौर शुरू हो रहा है,, इंशाअल्लाह अंजुमन उनसे फ़ैज़याब होती रहेगी।
—असग़र मेहदी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *