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पीएम मोदी का राष्ट्र को संबोधन: ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन’ पर कांग्रेस और सहयोगियों पर भ्रूण हत्या का आरोप

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नई दिल्ली, 18 अप्रैल 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक’ को लेकर विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने इसे “समय की मांग” बताते हुए कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी और DMK जैसे दलों पर संसद में इसकी “भ्रूण हत्या” करने का आरोप लगाया। पीएम ने कहा कि यह संशोधन सभी राज्यों की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था, जो संसद में हर राज्य की आवाज को मजबूत बनाने का माध्यम था।
संबोधन में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया, “नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है। नारी शक्ति वंदन संशोधन सभी राज्यों की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था। ये संसद में सभी राज्यों की आवाज को अधिक शक्ति देने का प्रयास था। सब राज्यों की समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी। लेकिन इस प्रयास की कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने भ्रूण हत्या कर दी है। कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी, DMK जैसे दल इस भ्रूण हत्या के जिम्मेदार हैं।”
संशोधन का उद्देश्य और विवाद का केंद्र
‘नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक’ लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला ऐतिहासिक कदम था, जिसे हाल ही में राज्यसभा में पेश किया गया। सरकार का दावा है कि यह विधेयक संघीय ढांचे को मजबूत बनाते हुए सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व देता। हालांकि, विपक्ष ने इसे अस्वीकार करते हुए जातिगत जनगणना और OBC आरक्षण की मांग की, जिसके कारण विधेयक पर चर्चा रुक गई। पीएम ने इसे “राज्यों की एकजुट आवाज को दबाने” की साजिश करार दिया।
सूत्रों के अनुसार, संशोधन में राज्यों को विधेयक पर समान मतदान का अधिकार देने का प्रस्ताव था, जो छोटे राज्यों को बड़े राज्यों के बराबर शक्ति प्रदान करता। विपक्षी दलों ने इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए विरोध जताया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने पीएम के बयान को “भ्रामक और विभाजनकारी” बताया। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “यह संशोधन महिलाओं के सशक्तिकरण का नहीं, बल्कि भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। हम OBC, SC/ST महिलाओं के लिए न्याय सुनिश्चित करना चाहते हैं।” TMC और DMK ने भी पीएम के “भ्रूण हत्या” वाले शब्दों की निंदा की, इसे संसदीय मर्यादा के खिलाफ ठहराया। समाजवादी पार्टी ने इसे “महिलाओं के नाम पर राजनीति” करार दिया।
राजनीतिक प्रभाव
यह संबोधन लोकसभा चुनावों से ठीक पहले आया है, जहां भाजपा विपक्ष के “अवरोध” को मुद्दा बनाने की रणनीति पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भाजपा को महिला वोटरों और संघीय मुद्दों पर लाभ मिल सकता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पहले इस विधेयक का समर्थन किया था, इसे “नारी शक्ति का उत्थान” बताते हुए।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि सरकार अब विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज सकती है या विशेष सत्र बुला सकती है। पीएम के संबोधन ने संसद की कार्यवाही को गति देने की अपील की, साथ ही राष्ट्र को एकजुट रहने का आह्वान किया।

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