महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर विवाद काफी गरमाया हुआ है। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने राज्य सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने की बात कही गई थी। हालांकि बाद में सरकार ने स्पष्ट किया कि हिंदी अनिवार्य नहीं होगी, बल्कि एक विकल्प के रूप में उपलब्ध होगी।
*विरोध के मुख्य बिंदु:*
– *हिंदी थोपने का आरोप*: मनसे का आरोप है कि सरकार जबरन हिंदी थोपी जा रही है, जो मराठी भाषा और संस्कृति के साथ अन्याय है।
– *क्षेत्रीय भाषा की प्राथमिकता*: राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जो राज्य की मातृभाषा है।
– *अन्य राज्यों में हिंदी नहीं*: उन्होंने सवाल उठाया कि जब उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में तीसरी भाषा नहीं सिखाई जाती है, तो महाराष्ट्र पर ही हिंदी क्यों थोपी जा रही है ¹ ²।
*सरकार का पक्ष:*
– *राष्ट्रीय शिक्षा नीति*: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में तीन भाषा नीति लाई है, जो पूरे देश के लिए है।
– *वैकल्पिक भाषा*: उदय सामंत ने स्पष्ट किया कि हिंदी भाषा अनिवार्य नहीं है, और छात्रों के पास विकल्प होगा कि वे हिंदी के अलावा कोई अन्य भारतीय भाषा चुन सकते हैं ³ ²।
अब देखना यह है कि सरकार और मनसे के बीच इस विवाद का समाधान कैसे निकलता है।




