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हक़ बोलना हक़ लिखना और उस पर अमल करना हर दौर में मुश्किल जुनेद अशरफ किछौछवी

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लखनऊ 31/10/2019 ऑल इण्डिया हुसैनी सुन्नी बोर्ड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सैयद जुनैद अशरफ किछौछवी ने कहा कि हक बोलना, हक लिखना और हक पर अमल पर करना हर दौर में मुश्किल रहा है। रबीअव्वल शरीफ का महीना आते ही हम आशिके रसूल होने का दम भरने लगते हैं। कभी सोशल मीडिया के ज़रिए या दोस्तोें की मजलिस में। मगर हम अपना आत्मनिरीक्षण करें कि क्या वाकई हम आशिके रसूल हैं। हज़रत अली फरमाते हैं कि वह शख्स सबसे बेहतर है जिसकी तंहाई बेहतर हो। इसीलिए मैं कहता हँू कि सिर्फ हक बोलना या लिखना बड़ी बात नहीं बल्कि उस पर अमल करना ज़रूरी है। अमल के बगैर सारी बाते बेमानी हैं। हमारे नबी ने सब खुद करके बताया। हक क्या है? सदाकत क्या है? सच्चा अमीन किसे कहते हैं? दोस्तों-रिश्तेदारों, गरीब-अमीर के दरम्यान कैसे मामलात रखने हैं। यह सिर्फ उन्होंने बताया ही नहीं बल्कि करके दिखाया भी। जब हक बात आई तो उन्हांेने अपने दुश्मनों से साफ कहा कि अगर तुम लोग मेरे एक हाथ में सूरज और दूसरे में चांद भी रख दो, फिर मैं हक से न हटूंगा। हम ईद मिलादुनबी के जलसे-जुलूस का आयोजन करते हैं। यह उनकी मोहब्बत फैलाने का बेहतरीन ज़रिया है मगर लोगों के दरम्यान इसी मोहब्बत को अमल में बदलने की ज़रूरत है। हमारे नबी जो अमन के पैगम्बर भी हैं, आलमे इसलाम को चाहिए कि 12 रबीअव्वल को वर्ल्ड पीस डे के रूप में मनाएं, साथ ही साथ अपने गरीब रिश्तेदारों, मिस्कीनोे, पड़ोसियों के साथ हुस्ने सुलूक रखें। गलत को गलत, हक को हक समझे तभी आप एक सच्चे आशिके रसूल होंगे वरना सारी बाते बेमानी हैं।

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