बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट देश को अराजकता की ओर ले जा रहा है और सीजेआई देश में गृह युद्धों के लिए जिम्मेदार हैं।
आपराधिक अवमानना की मांग: सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनस तनवीर और वकील शिवकुमार त्रिपाठी ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी को पत्र लिखकर दुबे के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की अनुमति मांगी है।
कानूनी आधार: कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट एक्ट, 1971 की धारा 15(1)(b) और सुप्रीम कोर्ट के 1975 के नियमों के तहत, अवमानना की कार्रवाई के लिए अटॉर्नी जनरल की सहमति आवश्यक है। दुबे के बयान को धारा 2(c)(i) के तहत आपराधिक अवमानना माना गया, क्योंकि यह कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने और न्यायपालिका में जनता के विश्वास को कम करने वाला है।
संभावित सजा: यदि केस चलता है और दोष सिद्ध होता है, तो दुबे को 6 महीने तक की कैद, 2,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
बीजेपी का रुख: बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दुबे के बयान से पार्टी को अलग करते हुए कहा कि यह उनका व्यक्तिगत विचार है और बीजेपी इसका समर्थन नहीं करती। पार्टी ने न्यायपालिका के प्रति सम्मान जताया है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: कांग्रेस, आप, और सपा जैसे विपक्षी दलों ने बयान को अपमानजनक और संविधान पर हमला करार दिया। कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने अटॉर्नी जनरल से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट का रुख: कोर्ट ने वकील अनस तनवीर की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। यदि बयान सार्वजनिक मंच पर दिया गया और कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला माना गया, तो सुप्रीम कोर्ट सीधे नोटिस जारी कर सकता है, क्योंकि बयान सदन के बाहर दिया गया था।
समयरेखा:
19 अप्रैल 2025: निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई संजीव खन्ना के खिलाफ विवादित बयान दिए, जिसमें वक्फ संशोधन बिल और अन्य फैसलों पर सवाल उठाए।
19 अप्रैल 2025: बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बयान से किनारा किया।
20 अप्रैल 2025: वकील अनस तनवीर और अन्य ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर अवमानना कार्रवाई की मांग की। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई।
21 अप्रैल 2025: कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने अटॉर्नी जनरल से त्वरित कार्रवाई की मांग की।
क्यों हो सकती है कोर्ट कार्रवाई?
अवमानना का आधार: दुबे का बयान सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला, भ्रामक, और जनता में न्यायपालिका के प्रति अविश्वास पैदा करने वाला माना गया। विशेष रूप से, सीजेआई पर गृह युद्ध भड़काने का आरोप गंभीर और अपमानजनक है।
कानूनी प्रक्रिया: बयान सार्वजनिक मंच (टीवी प्रोग्राम और X पोस्ट) पर दिया गया, जो संसद के बाहर का है। इसलिए, अनुच्छेद 105 के तहत लोकसभा स्पीकर की अनुमति के बिना कोर्ट सीधे नोटिस जारी कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता: कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी, जो कार्रवाई की संभावना को मजबूत करता है।
क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?
दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर संसद के अधिकारों का अतिक्रमण करने, धार्मिक युद्ध भड़काने, और पक्षपातपूर्ण फैसले देने का आरोप लगाया।
उन्होंने सीजेआई संजीव खन्ना को व्यक्तिगत रूप से गृह युद्ध जैसी स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया।
वकीलों ने तर्क दिया कि ये बयान न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और अखंडता पर हमला हैं।
कौन शामिल है?
निशिकांत दुबे: झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद, जिनके बयान ने विवाद खड़ा किया।
अनस तनवीर: सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड, जिन्होंने अवमानना याचिका दायर की और अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखा।
शिवकुमार त्रिपाठी: वकील, जिन्होंने भी अवमानना कार्रवाई की मांग की।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी: जिनकी सहमति कार्रवाई के लिए जरूरी है।
सीजेआई संजीव खन्ना: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, जिन पर दुबे ने व्यक्तिगत आरोप लगाए।
बीजेपी और जेपी नड्डा: पार्टी ने बयान से किनारा किया और न्यायपालिका के प्रति सम्मान जताया।
विपक्षी नेता: अभिषेक सिंघवी, जयराम रम Derivative Assistant: ### सुप्रीम कोर्ट: निशिकांत दुबे के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की मांग
मुख्य बिंदु:
विवादित बयान: बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना के खिलाफ गंभीर टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट देश को अराजकता की ओर ले जा रहा है और सीजेआई देश में गृह युद्धों के लिए जिम्मेदार हैं।
आपराधिक अवमानना की मांग: सुप्रीम कोर्ट के वकील अनस तनवीर और शिवकुमार त्रिपाठी ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी को पत्र लिखकर दुबे के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की अनुमति मांगी है।
कानूनी आधार: कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट एक्ट, 1971 की धारा 15(1)(b) और सुप्रीम कोर्ट के 1975 के नियमों के तहत, अवमानना की कार्रवाई के लिए अटॉर्नी जनरल की सहमति आवश्यक है। दुबे के बयान को धारा 2(c)(i) के तहत आपराधिक अवमानना माना गया, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने और जनता के विश्वास को कम करने वाला है।
संभावित सजा: यदि केस चलता है और दोष सिद्ध होता है, तो दुबे को 6 महीने तक की कैद, 2,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
बीजेपी का रुख: बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दुबे के बयान से पार्टी को अलग करते हुए कहा कि यह उनका व्यक्तिगत विचार है और बीजेपी इसका समर्थन नहीं करती।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: कांग्रेस, आप, और सपा जैसे विपक्षी दलों ने बयान को अपमानजनक और संविधान पर हमला करार दिया। कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने अटॉर्नी जनरल से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट का रुख: कोर्ट ने अनस तनवीर की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। चूंकि बयान सदन के बाहर दिया गया, अनुच्छेद 105 के तहत कोर्ट बिना स्पीकर की अनुमति के नोटिस जारी कर सकता है।
समयरेखा:
19 अप्रैल 2025: निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई पर वक्फ संशोधन बिल और अन्य फैसलों को लेकर विवादित बयान दिए।
19 अप्रैल 2025: बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बयान से किनारा किया।
20 अप्रैल 2025: वकील अनस तनवीर और अन्य ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर अवमानना कार्रवाई की मांग की। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई।
21 अप्रैल 2025: अभिषेक सिंघवी ने अटॉर्नी जनरल से त्वरित कार्रवाई की मांग की।
क्यों हो सकती है कोर्ट कार्रवाई?
अवमानना का आधार: दुबे का बयान सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला, भ्रामक, और न्यायपालिका में अविश्वास पैदा करने वाला माना गया। सीजेआई पर गृह युद्ध भड़काने का आरोप विशेष रूप से गंभीर है।
कानूनी प्रक्रिया: बयान सार्वजनिक मंच (टीवी प्रोग्राम और X पोस्ट) पर दिया गया, जो संसद के बाहर है। इसलिए, कोर्ट सीधे नोटिस जारी कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता: कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी, जो कार्रवाई की संभावना को दर्शाता है।
क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?
दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर संसद के अधिकारों का अतिक्रमण, धार्मिक युद्ध भड़काने, और पक्षपातपूर्ण फैसले देने का आरोप लगाया।
उन्होंने सीजेआई संजीव खन्ना को गृह युद्ध जैसी स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया।
वकीलों का तर्क है कि ये बयान न्यायपालिका की स्वतंत्रता और अखंडता पर हमला हैं।
कौन शामिल है?
निशिकांत दुबे: झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद।
अनस तनवीर: सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड, याचिकाकर्ता।
शिवकुमार त्रिपाठी: अवमानना कार्रवाई की मांग करने वाले वकील।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी: कार्रवाई के लिए उनकी सहमति जरूरी।
सीजेआई संजीव खन्ना: दुबे के आरोपों का लक्ष्य।
जेपी नड्डा: बीजेपी अध्यक्ष, जिन्होंने बयान से किनारा किया।
विपक्षी नेता: अभिषेक सिंघवी, जयराम रमेश, प्रियंका कक्कड़ आदि।
सुप्रीम कोर्ट: निशिकांत दुबे के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की मांग मुख्य बिंदु:




