लखनऊ 28/4/2024 कुछ दिन पहले मेरा काज़मैन रोड लखनऊ के तरफ से गुज़र हुआ ,
तो मैंने देखा कि शिया यतीम खाने के बाहर छोटे बच्चों को पढ़ाने (प्ले ग्रुप } का बोल्ड लगा है ,
तो मैंने सोचा कि यतीम खाने ने माशाल्लाह इतनी तरक्की कर लिए की बच्चों को अच्छी सुविधा देकर उनको इंग्लिश मीडियम स्कूल के लिए तैयार किया जा रहा है,
जानकारी प्राप्त करने पर पता चला कि कोई शिया यतीम ख़ाने मे कोई महिला ने यह प्ले ग्रुपहै ,
जिसका ₹5000 साल डोनेशन,
₹1200 महीना फीस है,
मैंने देखा कि इस प्ले ग्रुप के अंदर बच्चे आज की सुविधाओं के हिसाब से इंग्लिश बोलती हुई टीचरों से पढ़ रहे हैं,
फिर मैं उन यतीम बच्चों का जायज़ लिया जिनकी खातिर क़ौम के लोगों ने अपने खून पसीने की कमाई से यतीम ख़ाना बनवाया था,
वह बच्चे वहीं टूटी सीटों पर गर्मी में पढ़ रहे थे, और मासूमियत से उन बच्चों को देख रहे थे, जो बच्चे अपने पिता के साथ प्ले ग्रुप स्कूल में है ,
शायद उनके दिल में यह बात आ रही हो के काश मेरे भी पिता इस दुनिया में जिंदा होते,
और मैं भी ऐसे स्कूलों में पढ़ता,
पुराने लोग कहते थे कि देखो किसी यतीम के सामने अपने बच्चों को प्यार ना करना कि उसको मायूसी हो कि मेरा बाप नहीं है,
मौला अली की वसीयत है मेरे बाद यतीम को ख्याल रखना,
अल्लाह की किताब क़ुरआन में यतीम के लिए तो अल्लाह का फरमान है की देखो तुम उनका माल ना खा जाना,
आयात
ऐ ईमान वालों देखो इंसाफ करना ऐसा ना हो कि तुम यातीमो का माल अपने मालिक के साथ हरगिज ना मिला लेना,
जनाबे हजरत खिजर ने जनाबे मूसा के साथ दिनभर उन यतीम बच्चों के लिए वह दीवार बनाते रहे,
जिसके नीचे उनके मां-बाप कुछ दौलत छुप गए थे, टूटी हुई दीवार को बनाने का मक़सद के ऐसा ना हो कोई यतीमो का हक न मार दे
आज हम ग़ज़ा में हो रहे बच्चों पर अत्याचार के खिलाफ बोलते हैं
आज हम अयातुल्लाह ख़ूमैनी पर एनसीईआरटी बुक में आपत्तिजनक टिप्पणी पर छापने का जमकर विरोध करते हैं,,अच्छी बात है,
पर हम यतीम और यतीम खाने के बारे में क्यों अंधे, गूंगे, बहरे हो जाते हैं,
अल्लाह जाने लेकिन,
मैंने यह प्रतिज्ञा ली है कि जब तक यह लग्जरी प्ले ग्रुप बंद नहीं हो जाता है,
तब तक मैं इसका हर मंच से विरोध करूंगा,
मैं किसी बच्चे की पढ़ाई को रोकना नहीं चाहता हूं,
यह बच्चे उन बच्चों के साथ पढ़े तो सुभान अल्लाह
समाज सेवक
शब्बीर हुसैन
638849032.





