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लखनऊ आसिफी मस्जिद में नमाज के बाद इजरायल की निंदा - The Revolution News
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लखनऊ आसिफी मस्जिद में नमाज के बाद इजरायल की निंदा

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मजलिसे ओलमाए हिन्द के महासचिव और इमामे जुमा लखनऊ ने जुमे की नमाज़ में दिए गए अपने भाषण में अवैध आतंकी शासन इस्राईल द्वारा किए जाने वाले बर्बरतापूर्ण हमलों और मज़लूम फ़िलिस्तीनी जनता के हो रहे नरसंहार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ज़ायोनी शासन और उसका समर्थन करने वालों की कड़े शब्दों में निंदा की है।
भारत के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू और इमामे जुमा लखनऊ मौलाना सैयद कल्बे जवाद नक़वी ने ऐतिहासिक आसिफी मस्जिद में नमज़ियों को संबोधित करते हुए ग़ाज़ा पर जारी इस्राईली बर्बरता और निर्दोष फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार की कड़ी निंदा की है। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि इस्राईल की जंग हमास के साथ है, फिर भी इस्राईल मासूम और मज़लूम फ़िलिस्तीनियों पर ज़ुल्म और बर्बरता कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों पर बिजली और पानी बंद करना और ग़ज़्ज़ा तक पहुंचने वाली मानवीय सहायता के रास्ते में बाधाएं पैदा करना युद्ध के नियमो का स्पष्ट उल्लंघन है, लेकिन दुनिया इस क्रूरता पर चुप है। इमामे जुमा लखनऊ ने कहा कि पूरी दुनिया के लोग मज़लूम फ़िलिस्तीनियों के समर्थन में रैलियां निकाल रहे हैं, यहां तक कि यहूदियों ने भी आतंकी इस्राईली शासन की बर्बरतापूर्ण कार्यवाहियों के ख़िलाफ़ व्हाइट हाउस के सामने विरोध प्रदर्शन किया। इससे पता चलता है कि हर देश के लोग अवैध ज़ायोनी शासन की बर्बरता के ख़िलाफ़ और मज़लूम फ़िलिस्तीनी लोगों के साथ हैं।

मजलिसे ओलमाए हिन्द के महासचिव ने भारत सरकार के क़दम की सराहना करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने ग़ज़्ज़ा के मज़लूम लोगों के लिए जो मानवीय सहायता भेजी है, उससे साफ़ पता चलता है कि हमारा देश आज भी मज़लूम फ़िलिस्तीनियों के साथ खड़ा है। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि हमारी सरकार को आगे भी फ़िलिस्तीन के लिए मानवीय सहायता जारी रखनी चाहिए क्योंकि भारत ने हमेशा फ़िलिस्तीन का समर्थन किया है। उन्होंने आगे कहा कि इस्राईल के पाश्विक हमलों में बेगुनाह लोग मारे जा रहे हैं, एक रिपोर्ट के मुताबिक़, मरने वालों में ज़्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि इस समय सभी मुस्लिम देशों को इस्राईल के ख़िलाफ़ कड़ा रुख अपनाना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से यह देश निंदनीय बयानों से आगे नहीं बढ़ सके। उन्होंने कहा कि अरब देशों के लोगों ने भी इस्राईल के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया है, लेकिन अरब सरकारें औपनिवेशिक शक्तियों की ग़ुलाम हैं, इसलिए वे इस्राईली बर्बरता के ख़िलाफ़ स्पष्ट रुख अपनाने से घबराती हैं।

मौलाना कल्बे जवाद ने कहबा कि इस समय अकेला ईरान और उसके सहयोगी और समर्थित संगठन ही इस्राईल के ख़िलाफ़ खड़े हैं। अगर ईरान इस्राईल को मान्यता दे देता है तो उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हट जाएंगे, लेकिन ईरान हमेशा से मज़लूम फ़िलिस्तीन का समर्थन करता आया है और आज भी कर रहा है, जिसका खामियाज़ा उसे आर्थिक प्रतिबंधों के रूप में भुगतना पड़ रहा है। मौलाना कल्बे जवाद ने आगे कहा कि भारत सरकार को इस्राईल और हमास के बीच युद्धविराम के लिए प्रभावी क़दम उठाने चाहिए ताकि मज़लूमों का नरसंहार बंद हो सके। इमामे जुमा लखनऊ ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर हम चाहते हैं कि फ़िलिस्तीन की मज़लूम जनता के साथ दें उन्हें उनका अधिकार दिलाएं तो हमे अमेरिकी और इस्राईली उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए ताकि उन पर आर्थिक चोट की जा सके, इस बहिष्कार से उन्हें आर्थिक तौर पर हराया जा सकता है। जुमे की नमाज के बाद मज़लूम फिलिस्तीनियों के लिए दुआ और ज़ालिम इस्राईल की नाबूदी के लिए बददुआ हुई। साथ ही दुनिया में शांति और न्याय की स्थापना के लिए भी दुआ की गई। (RZ)

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