कोविड-19 जो मार्च 2020 से हिंदुस्तान में दस्तक देकर आज अप्रैल 2021 तक चरम सीमा तक पहुंच गया है पिछले साल भी कोरोनावायरस से बहुत से लोगों की मौत हुई और इस वर्ष कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण हर तरफ से मौत की खबरें सुनाई दे रही हैं श्मशान और कब्रिस्तान में जगह नहीं है शमशान का तो यह हाल है कि वह मुर्दों को भी लाइन लगानी पड़ रही है। लेकिन सरकार में बैठे हुए महानुभावों के माथे पर कोई शिकन नहीं है और ना ही सांत्वना में उनकी ज़ुबानें खुल रही हैं।
आज एक पत्रकार जो आज तक में एंकर का रोल अदा करते थे उनकी मृत्यु हो गई जिनका नाम रोहित सरदाना है उनकी मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री गृहमंत्री राष्ट्रपति प्रदेश अध्यक्ष से लेकर भाजपा का हर व्यक्ति उनकी मृत्यु पर शोक संदेश देने में लगा हुआ है। जब कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी की मौत हुई थी तो क्या तस्वीर सामने आई थी यह सबको याद है।
मैं यह बात साफ कर दूं कि रोहित सरदाना की मृत्यु पर दुख मुझे भी हुआ इसलिए नहीं कि रोहित सरदाना की मृत्यु हुई इसलिए कि दो बच्चियां यतीम हो गई इसका ज्यादा दुख हुआ। ईश्वर इन बच्चों की रक्षा करे।
कोई भी इंसान अपने कृत्य के लिए जाना और पहचाना जाता है और रोहित सरदाना न्यूज़ चैनल पर बैठकर क्या करते थे यह पूरा देश जानता है। उनके ट्वीट्स उनके स्टेटमेंट्स यूट्यूब पर उनकी एंकरिंग के वीडियोज़ उठाकर देख लीजिए सिर्फ और सिर्फ धार्मिक भावनाओं को भड़का कर आपस में लड़ाने के अलावा किसी दूसरी तरह की बातों का जिक्र आपको दिखाई नहीं देगा। अभी कुछ समय पूर्व उन्होंने रसूल अल्लाह की बेटी की शान में गलत बातें बयान की थी जिसका बहुत विरोध हुआ था लेकिन ना तो चैनल ने कोई कार्रवाई की और ना ही सरकार ने कोई कार्रवाई की। जालिम जब अपने पावर का इस्तेमाल करके कोई गलत कार्य करता है और उसका कोई कुछ बिगाड़ने वाला नहीं होता है तो जब ईश्वर उसे सजा देता है तो जनता खुश होती है। यही हो रहा है।
दूसरी सबसे बड़ी बात एक पत्रकार की मृत्यु के बाद जिस तरीके से भाजपा की पूरी टीम ऊपर से लेकर नीचे तक सब उसके लिए शोक संदेश देने में लगे हैं , यह क्या जाहिर करता है यह अपने आप में कई सवाल खड़े करता है क्या सवाल खड़ा करता है यह जो भी जागरूक पाठक हैं या देश की जागरूक जनता है वह खुद समझ सकती मुझे लिखने की जरूरत नहीं है लेकिन इसके दूसरे पहलू को देखिए कि क्या कोरोना से इस वर्ष और मौतें नहीं हुई है क्या कोई नेता नहीं मरा क्या कोई ऑफिसर नहीं मरा? लेकिन क्या प्रधानमंत्री गृहमंत्री राष्ट्रपति राज्यपाल लोकसभा अध्यक्ष इनमें से किसी के शोक संदेश आए?
खतरनाक कोरोना वायरस सितंबर 2020 तक एक पूर्व राष्ट्रपति, एक केंद्रीय मंत्री, 4 सांसद और छह विधायकों की जान ले चुका था। विधायकों में राज्यमंत्री भी शामिल थे। इनकी संख्या अब बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है लेकिन जिस तरीके से एक पत्रकार के मरने पर शोक संदेश देने वालों की लाइन लग गई उस तरीके से अनगिनत लोगों की मौत पर कोई दो शब्द कहने वाला नहीं है।
रोज सैकड़ों की तादाद में जो लोग मर रहे हैं जिनकी चिताओं को दफनाने के लिए कब्रिस्तान में जगह नहीं है, इनके चिताओं को जलाने के लिए श्मशान में लाइन लगानी पड़ रही है क्या इनके लिए कोई दो शब्द कहने वाला नहीं है? क्या राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, पार्टी अध्यक्ष, वर्तमान नेताओं का यह कर्तव्य नहीं है कि वह टीवी पर आकर आम जनता के मरने के लिए दो शब्द की संवेदना प्रकट करें।
मैं भी इंसानियत का हामी हूं लेकिन इंसानियत वह होती है जिसमें दो दिलों को, दो धर्मों को, दो इंसानों को, आपस में मिलाया जाए इंसानियत की परिभाषा यह नहीं है कि हम उसकी पैरवी करें जो लोगों के बीच में नफरत का बीज बो रहा है। इस देश में हर वो शख्स जो धर्म के नाम पर लड़ाने की कोशिश कर रहा है जो जाती बिरादरी के नाम पर ऊंच-नीच भेदभाव का पाठ पढ़ा कर लोगों के बीच गलत भावनाएं पैदा कर रहा है। एक दूसरे से दुश्मनी पैदा कर रहा है चाहे वह छोटा इंसान हो चाहे बड़ा हो, चाहे वह किसी ऊंचे पद पर बैठा हो या सड़क पर चलता आम इंसान हो ऐसा इंसान इंसानियत का पैरोकार नहीं है बल्कि वह इंसानियत का दुश्मन है और ऐसे इंसान का सपोर्ट करना बिल्कुल गलत है।
रोहित सरदाना की मौत से आज सारे पत्रकार को सबक ले लेना चाहिए खासकर उन पत्रकारों को जो अपना जमीर बेच कर के पैसों की लालच में रिपोर्टिंग करते हैं उनको सबक ले लेना चाहिए कि जो भी इस दुनिया में आया है उसे दुनिया से जाना है ऐसा करके जाओ कि लोग अच्छे शब्दों में याद रखें ऐसा करके ना जाओ कि लोग तुम्हारे जाने के बाद खुशियां मनाएं।
ईश्वर से प्रार्थना है कि मृतक पत्रकार के बच्चियों को दुख सहने की शक्ति दे और उनकी सुरक्षा करे।
जयहिंद।
सैय्यद एम अली तक़वी
ब्यूरो चीफ दि रिवोल्यूशन न्यूज़
लखनऊ