कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान आयोजित एक जनसभा में जनता से सीधा संवाद किया। सभा के बीच जब एक युवक खड़ा होकर अपनी बात रखने लगा, तो कार्यकर्ताओं ने उसे बैठाने की कोशिश की। प्रियंका गांधी ने यह दृश्य देखकर युवक को मंच पर बुलाया और उसका नाम पूछा। युवक ने अपना नाम आसिफ खान बताया और कहा कि उसके भाई ने नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (NET) का एग्जाम दिया था, लेकिन पेपर लीक मामले के कारण उसका चयन नहीं हो पाया। अब उसने एसएससी की परीक्षा दी थी, जिसका परिणाम आने के बाद उसे फिर से पेपर लीक की आशंका है। आसिफ ने बताया कि जब उसने प्रशासन से शिकायत की कोशिश की, तो उसके साथ मारपीट की गई।
प्रियंका गांधी ने उसकी बात पूरी गंभीरता से सुनी और सभा को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि जनता की समस्याएं सुनना और उनका समाधान करना ही जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने इस मौके पर अपने पिता राजीव गांधी से जुड़ा एक प्रसंग भी साझा किया। प्रियंका ने बताया कि बचपन में अमेठी में जनसंपर्क के दौरान एक बुजुर्ग महिला ने उनके पिता से नाराज होकर कहा था कि सात महीने पहले नल लगाने का वादा किया था पर अभी तक नहीं लगा। तब राजीव गांधी ने शांतिपूर्वक कहा था कि फाइल प्रक्रिया में है, दो महीने में कार्य पूरा हो जाएगा। जब प्रियंका ने उनसे पूछा कि आपने कुछ कहा क्यों नहीं, तो उन्होंने कहा, “बेटी, यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम जनता की शिकायतें सुनें और उनका समाधान करें।




