सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें केवल बीमार या आक्रामक व्यवहार वाले कुत्तों को शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया गया है। अन्य कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उनकी मूल जगह पर वापस छोड़ा जाएगा। यह फैसला पशु प्रेमियों और पशु कल्याण संगठनों के लिए राहत की बात है, जिन्होंने पिछले आदेश को अमानवीय और अव्यावहारिक बताकर इसका विरोध किया था।
*फैसले के मुख्य बिंदु:*
– *बीमार और आक्रामक कुत्तों को शेल्टर में रखा जाएगा*: केवल रेबीज से संक्रमित या आक्रामक व्यवहार वाले कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाएगा।
– *नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को छोड़ा जाएगा*: अन्य कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
– *शेल्टर होम में क्षमता बढ़ाने का निर्देश*: सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों को शेल्टर होम की क्षमता बढ़ाने और नसबंदी-टीकाकरण कार्यक्रम को तेज करने का निर्देश दिया है।
– *पशु प्रेमियों को गोद लेने की अनुमति*: पशु प्रेमी कुत्तों को गोद लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन गोद लिए गए कुत्तों को सड़कों पर नहीं छोड़ा जा सकता।
– *निर्धारित क्षेत्रों में ही खिलाने की अनुमति*: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि कुत्तों को निर्धारित क्षेत्रों में ही खिलाया जा सकता है, सड़कों पर नहीं।
*चुनौतियां और आगे की राह*
दिल्ली नगर निगम के सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में कुत्तों के लिए कोई समर्पित शेल्टर नहीं है, और मौजूदा 20 नसबंदी केंद्रों की क्षमता केवल 2,500 कुत्तों की है। विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए कम से कम 70% कुत्तों की नसबंदी जरूरी है, जो मौजूदा संसाधनों के साथ असंभव है।
*जनता का नजरिया*
लोकलसर्किल्स के एक सर्वे के अनुसार, 71% लोग 11 अगस्त के आदेश का समर्थन कर रहे थे, क्योंकि कुत्तों के काटने की घटनाएं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बन रही थीं। हालांकि, पशु प्रेमियों का कहना है कि कुत्ते कॉलोनियों की सुरक्षा करते हैं और उन्हें भगवान भैरव का वाहन मानकर पूजा जाता है ¹ ²।





