हिंदुस्तान की सर जमीन को सलाम पार्ट-2
कुराने पाक में रसूल अ,स के क़राबतदार/अहलेबैत के लिए आयात
सूर शूरा आयत नम्बर 23
ऐ रसूल तुम इनसे कह दो मैं इस तबलीग़े के रिसालत का अपने क़राबतदारों/अहलेबैत की मोहब्बत के सिवा तुमसे कोई सिला नहीं मांगता हूं
हदीस
प्रोफेट मुहम्मद हसन हुसैन मेरी आंखों के नूर है
हुसैन मुझे से है और मैं हुसैन से हूं जिसने हुसैन को तकलीफ दी,
उसने मुझको तकलीफ दी जिसने मुझको तकलीफ दी उसने अल्लाह को तकलीफ दी,
अल्लाह की किताब और हदीस को दरकिनार करते हुए,
उन्ही मतलबपरस्त अवसरवादी मुसलमान ने इमामे हसन को ज़हेर देकर, और इमामे हुसैन को कर्बला के मैदान में तीन दिन का भूखा-प्यासा शहीद कर दिया,
जिस देश से प्रॉफिट को ईमान की खुशबू महसूस हो रही थी,
प्रॉफिट अपने नाती को आंखों के नूर,
जिगर का टुकड़ा इमामे हुसैन ने खून न बहे इसलिए हिंद जाने को कहां था,
आज पूरी दुनिया के वही यजीदी आतंकवाद ने जबकि इस महान देश में हर धर्म के लोगों को अपने धर्म के हिसाब से जीने /संस्कृति पर चलने की आजादी है,
कुछ बिके हुए फर्जी कट्टर मुसलमानों की जाहिलियत से हमारे सनातन भाइयों के दिल में नफरत पैदा की जा रही है,
लेकिन उनका ये षड्यंत्र नाकामयाब है,आज हमारे देश में जिस तरीके से शिया सुन्नी और कुछ पर्सेंट हिंदू अपने घर,मोहल्ला,चौक पर ताजिया रख कर हुसैन का ग़म मना रहे हैं, और बचे हुए सनातन भाई दिल से हमारे प्रॉफिट की आल-अली, फातिमा, हसन, हुसैन से बहुत मोहब्बत, इन 4 पर हुई प्रताड़ना और हत्या का खुल कर विरोध करते हैं, इसी पर सीतापुर के एक हिंदू शायर ने किशन लाल ने नौहा लिखा
भारत में अगर आ जाता ह्रदय में उतारा जाता वो चांद बनी हाशिम का धोखे से न मारा जाता
ये मोहब्बत के बोल सुन कर आप के आंखो में आंसू आ जाएंगे
चौखट से न उठते माथे
हर ओर से पूजा होती
इस देश की हर भाषाओं में भगवान पुकारा जाता
शाबू ज़ैदी
717032786





