नई दिल्ली/गुरुग्राम: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संस्थापक और नागर निगम सदर (गुरुग्राम) चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ राजनीति के उभरते सूरज हैं।
एक गरीब किसान परिवार में जन्मे ये सपूत आज देश की सियासत में वो ताकत हैं,
जो आने वाले कल में 140 करोड़ जनता का भाग्य संवारेंगे।
सड़क से संसद तक का उनका सफर प्रेरणा की मिसाल है—NRC, CAA, संशोधन और तीन तलाक जैसे मुद्दों पर उन्होंने डटकर लड़ाई लड़ी।
संसद में जब वे गरीबों, दलितों, अल्पसंख्यकों की तकलीफें और सम्मान की बात उठाते हैं,
तो लगता है स्वर्गीय बाबासाहेब अंबेडकर ने दूसरा जन्म ले लिया हो।
यूजीसी कानून को जमीनी स्तर पर लागू कराने की उनकी मुहिम अनुकरणीय है। वे SC, ST, OBC की पीड़ा का इलाज इसी कानून में देखते हैं और देश के कोने-कोने से एकजुट होकर संसद तक आवाज पहुंचा रहे हैं।
हर मुद्दे पर वे अड़े रहते हैं—जब तक कानून लागू न हो जाए।
गुरुग्राम जैसे शहर से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर चमकने वाले चंद्रशेखर आजाद की बहादुरी, निडरता और जनसेवा का गुणगान हर भारतीय को करना चाहिए।
वे न सिर्फ लड़ते हैं, बल्कि जीतते भी हैं—गरीबों के मसीहा के रूप में!





