संविधान के मौलिक अधिकार आर्टिकल 25 कहता है कि प्रत्येक नागरिक को स्वेच्छा से अपने धर्म पर चलने और उसका प्रचार प्रसार करने का पूरा अधिकार है.
यानि मुझे मेरी टोपी और तुम्हें तुम्हारा तिलक लगाने की पूरी आज़ादी देने की वकालत करता है. इसमें यह कहीं नहीं कहा गया कि तुम मेरी टोपी लगा लो मैं तुम्हारा तिलक लगा लूं.
अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वो गैर संवैधानिक अमल की श्रेणी में आयेगा. लिहाज़ा ये दोनों तस्वीरें गैर संवैधानिक हैं. मज़े की बात तो यह है कि संविधान बचाने का नारा देने वाले समाजवादी पार्टी के नेता ही संविधान विरोधी कार्य कर रहे हैं.
पॉलिटिकल सेक्युलरिज़्म की संविधान में कोई जगह नहीं है इसने ही मुसलमानों की ज़िंदगी बर्बाद कर दीं हैं लोग झूठ कहते हैं ऐसा करने से नफ़रत मिटेगी. जबकि नफ़रत को मिटाना है तो सामने आकर नफ़रत से लड़ना पड़ेगा.
लेकिन देखा जाता है कि नफ़रत के खिलाफ़ लड़ने की जगह टोपी और तिलक की अदला बदली करके आवाम को गुमराह करने का काम किया जाता है.
मुसलमान ऐसे लोगों के पीछे चलकर संविधान बचा रहा है जो ख़ुद संविधान की तौहीन कर रहे हैं. ऐसे फितनों से बचने के लिए मुस्लिमों को संविधान पढ़ना बहुत ज़रूरी है.



