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NCERT: क्लास 8 बुक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ लिखने वाले प्रोफेसरों ने मांगी सुनवाई, बताया करियर का संकट: शाबू ज़ैदी

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नई दिल्ली, 7 अप्रैल 2026: NCERT की क्लास 8 की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक अध्याय लिखने वाले तीन प्रोफेसरों ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी सुनवाई की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद सार्वजनिक संस्थानों से बाहर किए गए इन प्रोफेसरों का कहना है कि बिना ठीक से सुने कार्रवाई से उनका करियर खतरे में पड़ गया है। उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई है कि उनका पक्ष सुना जाए।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से मचा हंगामा
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा के दौरान NCERT की क्लास 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ नामक अध्याय मिला, जिसे तीन प्रोफेसरों—डॉ. राजेश कुमार, प्रो. अनिता शर्मा और डॉ. विवेक सिंह—ने लिखा था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाना असंवैधानिक है। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने इन प्रोफेसरों को उनकी संस्थाओं—दिल्ली विश्वविद्यालय, JNU और BHU—से हटा दिया।
प्रोफेसरों का पक्ष: बिना सुनवाई के कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में प्रोफेसरों ने कहा कि अध्याय में भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता फैलाने का उद्देश्य था, न कि न्यायपालिका को बदनाम करने का। उन्होंने दावा किया कि अध्याय ऐतिहासिक तथ्यों और केस स्टडीज पर आधारित था। याचिकाकर्ताओं ने कहा, “हमें कोई नोटिस नहीं दिया गया, न ही जांच का मौका मिला। इससे हमारा करियर नष्ट हो रहा है।” वे प्रोफेसर बनने के बाद से NCERT के पैनल में कार्यरत थे।
कोर्ट में सुनवाई की मांग
प्रोफेसरों के वकील ने तर्क दिया कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है और बिना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन कार्रवाई गैरकानूनी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत और पूर्ण सुनवाई की मांग की है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
शिक्षा मंत्रालय का रुख
मंत्रालय ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों में संवेदनशील विषयों पर सावधानी बरतनी चाहिए। इस घटना से शिक्षा जगत में बहस छिड़ गई है कि क्या स्कूली पाठ्यक्रम में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर खुली चर्चा होनी चाहिए।
यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, और इसका फैसला शिक्षा नीति पर असर डाल सकता है।

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