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रसूल-ए-खुदा ने सादाकत और अमानत की तालीम दी :मौलाना सैफ अब्बास

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इमामबाड़ा जन्नत मआब सैयद तकी साहब अकबरी गेट लखनऊ में अशरए मुहर्रम की छठी मजलिस को मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी साहब ने “अहलेबैत नजात का रास्ता” विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि लोगों को गुमराही और ज़िल्लत से निकालकर निजात के रास्ते पर लाने के लिए सबसे पहले रसूल-ए-खुदा ने सादाकत और अमानत की तालीम दी और फिर फरमाया “क़ौलू ला इलाहा इल्लल्लाह तोफलहू”, अर्थात ला इलाहा इल्लल्लाह कहो और निजात पाओ।
अब जिन लोगों ने ला इलाहा इल्लल्लाह कहा, वे नजात पा गए, लेकिन जब खुदा की तरफ से दूसरा हुक्म आ गया, तो अब सिर्फ ला इलाहा इल्लल्लाह से निजात नहीं मिलेगी। अब दूसरा हुक्म मानना पड़ेगा। इसी तरह जैसे जैसे हुक्म आता जाएगा, अमल करना पड़ेगा, तब निजात मिलेगी। इस्लाम का आखिरी हुक्म था ग़दीर में विलायत अली अ स का ऐलान।
मौलाना ने कहा कि अब दुनिया इंसाफ से बताए कि अगर इस्लाम का सारा हुक्म माने, लेकिन कोई एक हुक्म न माने, तो क्या निजात पा सकता है? नहीं पा सकता। इसी लिए अहलेबैत की मुहब्बत को जरूरी क़रार दिया गया, ताकि उनकी विलायत को मानते जाओ और निजात हासिल करते जाओ।
अंत में मौलाना ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के 18 साल के जवान बेटे हज़रत अली अकबर अलैहिस्सलाम का करबला में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम पर अपनी जान को कुर्बान करके शहीद होने का दिलसोज़ मंज़र बयान किया, जिसे सुनकर अज़ादारों ने ग़म और मातम किया।
मजलिस के बाद शबीह-ए-ताबूत हज़रत अली अकबर अलैहिस्सलाम बरामद हुआ, जिसकी ज़ियारत कराई गई और तबर्रुक तौज़ी किया गया।

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