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किताब को समझना है तो विलायते अली की रौषनी मे समझना होगा: मौलाना सैफ अब्बास

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इमामबाड़ा सैयद तक़ी साहब में अषरए मजालिस की आठवी मजलिस को विलायत के विषय पर संबोधित करते हुए मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि अहलेबैत की मिसाल उस चिराग़ कि तरह है जो रास्ते मे रौषनी का काम करता है! अब अगर किसी को स्वर्ग जाना है तो विलायत की रौषनी मे जाना होगा पैगम्बर मोहम्मद साहब के तुरन्त बाद विलायत को रखा ताकि बादे मोहम्मद स अ दीन को क़यामत तक सुरक्षछित तरीके़ से ले जा सकें! क्योकि रसूल स अ ने फरमाया कि मै और अली एक नूर से है और खुदा क़ुआन मे फरमाता है कि हमने तुम्हारी तरफ नूर को और किताब को भेजा है ; सूरा 5 अयत 15 द्धइस बात से पता चलता है कि किताब को समझना है तो विलायते अली की रौषनी मे समझना होगा तभी किताबे खुदा समझ मे आएगी अब मुसलमान कहता रहे कि हमारे लिए किताबे काफी है मगर काफी नही हो सकता क्योकि फरमाने रसूल है कि क़ुआन और अहलेबैत एक दूसरे से जुदा नही हो सकते बल्के हौज़े कौसर पर आकर मुलाक़ात करेंगे मालूम हुआ कि स्वर्ग तक जाना है तो किताब के साथ विलायत को श्ी मानना होगा!
अन्त में मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने जनाबे अब्बास अ स की षहादत को ब्यान किया जिसे सुनकर अज़ादारों ने गिरया व मातम किया। और षबीहे अलम मोबारक निकाला गया व तबर्रुकात तकसीम हुए।

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