13 रमजान 24 मार्च 2024
कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैय्यद सादिक़ हुसैनी शीराज़ी से जारी हेल्प लाइन पर नीचे दिए गये प्रश्नो के उत्तर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी एवं उलेमा के पैनल ने दिए-
लोगों की सुविधा के लिए ‘‘शिया हेल्पलाइन’’ कई वर्षों से धर्म की सेवा कर रही है, इसलिए जिन मुमेनीन को उनके रोज़ा, नमाज़ या किसी अन्य धार्मिक समस्या के बारे में संदेह है, तो वह तमाम मराजए के मुकल्लेदीन के मसाएले शरिया को जानने के लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे आप इन नंबरों 9415580936, 9839097407 पर तक संपर्क कर सकते हैं। एवं ईमेलः उंेंम स786/हउंपसण्बवउ पर संपर्क करें।
नोट- महिलाओं के लिए हेल्प लाइन शुरू की गयी है जिस मे महिलाओं के प्रश्नों के उत्तर खातून आलेमा देेगीं इस लिए महिलाओं इस न0 पर संपर्क करें। न0 6386897124
सवाल- अगर कोई शख्स रोजे की हालत में सफर करे और उसे मालूम न हो कि सफर में रोजा नहीं रखना चाहिए तो क्या हुक्म है?
जवाब- अगर दिन में पता चल जाए तो रोज़ा टूट जाएगा और अगर मगरिब तक पता न चले तो रोज़ा सही है।
सवाल- अगर रोजादार शख्स को बेहोश करके ऑपरेशन किया जाए तो क्या रोजा हुक्म है ।
उत्तर- रोज़ा पूरा करेगा और और एहतेयाते वाजिब की बिना पर क़ज़ा करेगा।
सवाल- क्या रोजे के दौरान नाक से भाप (इसटीम)लेना सही है?
उत्तर- नाक से इसटीम में कोई हरज नहीं है।
प्रश्न- क्या कोई व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति को जकात दे सकता है जिसका खर्चे उस पर वाजिब हों, जैसे कि औलाद?
जवाब- उन्हें जकात नहीं दी जाएगी, हालांकि दूसरे लोग जकात दे सकते हैं।
सवाल- क्या कोई पिता अपने बेटे को किताबों के लिए जकात दे सकता है?
जवाब- इल्मी दीनी किताबों की जरूरत हो तो पिता जकात से खरीद कर दे सकता हैं।





