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शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्: योग भारत की ऋषि परंपरा का अमूल्य धरोहर*

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने आज गोरखपुर में 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कहा कि ‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’ यह मंत्र हमें स्वस्थ काया और स्वस्थ मस्तिष्क दोनों प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि योग हमारी प्राचीन ऋषि परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आज पूरे विश्व में अपनी उपयोगिता और महत्व को सिद्ध कर रहा है।

*योग और प्रधानमंत्री मोदी की पहल*

मुख्यमंत्री ने आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने योग की इस विरासत को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाकर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इस पहल से न केवल भारत की योग परंपरा को विश्वभर में प्रसिद्धि मिली, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया गया।

*विश्व में योग की लोकप्रियता*

आज पूरा विश्व भारत की योग की विरासत के साथ जुड़कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है। योग साधना न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, बल्कि मानसिक शांति और संतुलन भी प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने सभी योग साधकों को हृदय से बधाई दी और कहा कि योग के माध्यम से हम अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं।

*निष्कर्ष*

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि योग हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे नियमित रूप से योग का अभ्यास करें और इसके लाभों को अपने जीवन में उतारें। इस प्रकार, हम अपने स्वास्थ्य और समाज के कल्याण के लिए योग की शक्ति का उपयोग कर सकते हैं [5]।

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