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विज्ञान के इतिहास में 26 सितम्बर काफ़ी महत्वपूर्ण है।

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एनस मिराबिलिस (Annus mirabilis) लैटिन शब्द है जिसका अर्थ अदभुत या चमत्कारी वर्ष। इस शब्द का प्रयोग उन वर्षों के संदर्भ में किया जाता है जिनके दौरान प्रमुख महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित हुईं। विज्ञान के संदर्भ में तीन अवधियों को इस श्रेणी में रखा गया है।

पहला है 1543 – विज्ञान का वर्ष, इस वर्ष यूरोप में सही अर्थों में वैज्ञानिक क्रांति की शुरुआत हुई। जबकि एंड्रियास वेसालियस ने बेसल में “डी ह्यूमैनी कॉरपोरिस फेब्रिका” (ऑन द फैब्रिक ऑफ द ह्यूमन बॉडी) प्रकाशित की, जिसने मानव शरीर रचना विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ला दी। इसी वर्ष निकोलस कोपेरनिकस की जर्मनी के नूर्नबर्ग में डी रिवोल्यूशनीबस ऑर्बियम कोएलेस्टियम (ऑन द रेवोल्यूशन ऑफ द हेवनली स्फीयर्स) प्रकाशित की गयी।
दूसरा है 1666 – चमत्कारों का वर्ष, जबकि 23 वर्ष की आयु में न्यूटन ने कैलकुलस, गति, प्रकाशिकी और गुरुत्वाकर्षण में क्रांतिकारी खोजें और आविष्कार किए। प्लेग के प्रकोप से कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के बंद होने के कारण उन्हें अपने सिद्धांतों पर काम करने का पर्याप्त समय मिला जब वह वह लिवर्पूल अपने घर आ गए। संभवतः इसी वर्ष न्यूटन ने एक पेड़ से एक सेब को गिरते हुए देखा था, और जिससे उन्हें गुरुत्वाकर्षण के नियम को समझने में मदद मिली।
तीसरा है 1905 – अल्बर्ट आइंस्टीन का वर्ष, कि जब 26 वर्ष के अल्बर्ट आइंस्टीन ने फोटोइलेक्ट्रिक इफ़ेक्ट, ब्राउनियन गति, स्पेशल थेयिरी ओफ़ रिलेटिविटी (सापेक्षता के विशेष सिद्धांत) और प्रसिद्ध एनर्जी-मास (ऊर्जा-द्रव्यमान) समीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण खोजों को प्रकाशित किया था। उनके यह चार लेख, जिन्हें सामूहिक रूप से उनके एनस मिराबिलिस पेपर के रूप में जाना जाता है,
26 सितम्बर 1905 के Annalen der Physik नामक जर्नल के अंक में उनके “The Annus mirabilis papers” नाम से चार शोध पत्र प्रकाशित हुए थे। इन लेखों ने आधुनिक भौतिकी में एक इंक़िलाब बरपा कर दिया था।
-असग़र मेहदी

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