नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2025: वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर भारतीय संसद में लंबे समय से चल रही बहस आखिरकार एक अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। लोकसभा में 2 अप्रैल 2025 को इस विधेयक पर करीब 12 घंटे तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी चर्चा हुई, जिसके बाद देर रात वोटिंग के जरिए इसे पारित कर दिया गया। विधेयक के समर्थन में 288 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 232 वोट डाले गए। अब यह विधेयक आज, 3 अप्रैल 2025 को सुबह 1:00 बजे राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां इसकी मंजूरी के लिए एक और दौर की बहस और वोटिंग की उम्मीद है।
विधेयक का सफर और चर्चा का दौर
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को पहली बार 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में पेश किया गया था। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन कर वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता लाना है। हालांकि, विधेयक को लेकर विपक्ष ने शुरू से ही कड़ा विरोध जताया था, जिसके चलते इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया। जेपीसी ने 30 जनवरी 2025 को अपनी 655 पन्नों की रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपी, जिसमें 14 संशोधनों को मंजूरी दी गई थी।
2 अप्रैल को लोकसभा में विधेयक पर चर्चा सुबह शुरू हुई और देर रात तक चली। इस दौरान सत्ता पक्ष ने इसे वक्फ बोर्ड की अनियमितताओं को दूर करने वाला कदम बताया, वहीं विपक्ष ने इसे संविधान के खिलाफ और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला करार दिया। चर्चा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और किरेन रिजिजू ने सत्ता पक्ष की ओर से मजबूत दलीलें पेश कीं, जबकि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और AIMIM जैसे दलों ने इसका पुरजोर विरोध किया। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तो विधेयक की प्रति फाड़कर अपना विरोध दर्ज किया।
वोटिंग और संख्याबल
लोकसभा में वोटिंग के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का संख्याबल निर्णायक साबित हुआ। एनडीए के पास कुल 296 सांसद हैं, जिसमें भाजपा के 240, टीडीपी के 16, जदयू के 12, शिवसेना के 7, लोजपा के 5 और अन्य सहयोगी दलों के 16 सांसद शामिल हैं। विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े, जो बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से कहीं अधिक थे। दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन के पास 235 सांसद थे, लेकिन विपक्ष में केवल 232 वोट ही पड़ सके।
विधेयक की मुख्य बातें
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 में कई अहम बदलाव प्रस्तावित हैं, जिनमें शामिल हैं:
वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण: सर्वेक्षण आयुक्त की जगह अब जिला कलेक्टर को वक्फ संपत्तियों के सर्वे का अधिकार दिया गया है।
गैर-मुस्लिम और महिला प्रतिनिधित्व: केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों और कम से कम दो महिलाओं को शामिल करने का प्रावधान।
अतिक्रमण और स्वामित्व: सरकारी संपत्तियों को वक्फ के दायरे से बाहर करने और स्वामित्व विवादों के निपटारे के लिए कलेक्टर की भूमिका तय की गई है।
अपील का अधिकार: वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को अंतिम मानने का प्रावधान हटाकर उच्च न्यायालय में अपील का रास्ता खोला गया।
डिजिटल पारदर्शिता: सभी वक्फ संपत्तियों का विवरण छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करने का नियम।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के तर्क
सत्ता पक्ष का कहना है कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड में व्याप्त भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को खत्म करेगा। अमित शाह ने कहा, “यह कानून संविधान के दायरे में है और किसी के अधिकारों पर अंकुश नहीं लगाता। विपक्ष इसे वोट बैंक की राजनीति के लिए गुमराह कर रहा है।” वहीं, विपक्षी नेताओं ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमला बताया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “जेपीसी में विपक्ष के सुझावों को नजरअंदाज किया गया। यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करता है।”
आगे की राह
लोकसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश होगा। राज्यसभा में एनडीए के पास 115 सांसद हैं, और छह मनोनीत सांसदों के समर्थन के साथ यह संख्या 121 तक पहुंच सकती है, जो बहुमत के लिए जरूरी 119 से थोड़ा अधिक है। विपक्ष के पास 85 सांसद हैं, जबकि वाईएसआर कांग्रेस (9), बीजेडी (7) और एआईएडीएमके (4) जैसे गैर-गठबंधन दलों का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। यदि राज्यसभा से भी मंजूरी मिलती है, तो यह विधेयक कानून बन जाएगा।
समाज पर प्रभाव
इस विधेयक को लेकर देशभर में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे “वक्फ संपत्तियों को हड़पने की साजिश” करार दिया, वहीं कई मुस्लिम महिलाओं और अन्य समूहों ने इसका समर्थन करते हुए इसे पारदर्शिता की दिशा में कदम बताया। भोपाल में मुस्लिम महिलाओं ने आतिशबाजी कर “थैंक्यू मोदी जी” के नारे लगाए।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 अब भारतीय संसद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है। राज्यसभा में इसकी मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह कानून देश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को कितना प्रभावित करेगा।




