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लखनऊ के धर्म गुरुओं का गिरता हुआ मेयार

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एक जमाना था कि मौलाना अल्लाह के दीन को लोगों तक पहुंचाने व तब्लीक़ करने का कुछ अज्र नहीं लेते थे,

अपने व परिवार का पेट पालने के लिए हिक्मत/ इस्लामी किताबें लिखकर जो पैसा कमाते थे, (जायज़ कमाई) से अपना व अपने परिवार का पेट भरते थे,
और बचे हुए पैसों से लोगों की मदद भी करते थे,
जिसकी वजह से रब ने उनके चेहरे पर तेज/नूर और लोगों में बेशुमार मोहब्बत पैदा कर देता था,
ऐसी मोहब्बत की उनकी मोहब्बत में लोग अपनी जान कुर्बान करने पर राजी रहते थे,
तेज और उनकी लोकप्रियता देखकर के बड़े-बड़े राजनेता उनसे मिलने के लिए लाइन लगाए खड़े रहते थे,
मौलामाओ के कहने पर नेता इमामबारगाहों में अपनी मुराद का चिल्ला बंधवाने सर झुका के जाते थे,
धीरे-धीरे दुनिया में लोगों ने दिखावे की तरक्की की उसमें हमारे मौलाना भी पीछे नहीं रहे, उन्होंने भी अल्लाह के दी न को लोगों तक पहुंचाने के लिए अज्र लेने लगे, जिसकी वजह से अल्लाह ने उनके चेहरे का तेज और लोकप्रियेता खत्म कर दी,तब शैतान उनके पीछे लग गया इनकी बुद्धि भ्रष्ट कर दी, यह खुद जाकर राजनेताओं से मिलने के लिए लंबी-लंबी लाइन लगाकर,उनके दर्शन करने लगे,
हालत यह हुई की जो मन्नत चिल्ला बंधवाने राजनेता इमामबारगाहों में सर झुका कर आते थे,
मौलाना खुद उस चमत्कारी धागे को ले जाकर राजनेताओं के दाहिने हाथ पर बाधने लगे,
क़ौम फटी आंखों से यह सब देख रही है के हमारे मौलाना को क्या हुआ है यह क्यों इतना झूठ और मक्कारी कर रहे हैं
इससे यह जाहिर होता है कि कयामत बहुत करीब है क्योंकि उन बुजुर्ग मौलाना से मैंने सुना है जहूर के वक्त इमाम की तलवार से 70 हजार मौलानाओ के सर क़लम. किये जाएंगे ????
शब्बीर हुसैन 6388490320

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