मदर डे-बहुत-बहुत मुबारक, बधाई
एक मुद्दत मेरी मां सोई नहीं ताबिश
मैंने एक बार कहा था मुझे डर लगता है
मदर डे जिसने भी उसकी शुरुआत की है,
शायद वह अपनी मां को बहुत मोहब्बत-प्यार करता था,
मैं ये चाहता हूं कि मदर डे अंतर्राष्ट्रीय फेस्टिवल त्योहार, पर्व के रूप में मनाया जाना चाहिए ,
क्योंनहीं मां हमको अपनी जिंदगी जोखिम मे डाल के पैदा करती है, और अपना तन मन क़ुर्बान कर के हमें पालती है,
किसी शायर ने बहुत खूब लिखा
मेरी तक़दीर में कोई ग़म नहीं होता
मेरी तक़दीर लिखने का हक़ मां को होता,
प्रोफेट मोहम्मद से किसी ने पूछा,मेरी मां वृद्धा और बीमार है, मैं उनकी काफी सालों से सेवा कर रहा हूं, क्या मैंने उनके पालन पोषण का कर्ज अदा कर दिया,
आपने जवाब दिया अभी उस एक रात का कर्ज तुम नहीं उतार पाए, जिस रात को व तुमको अपने पेट में दर्द के मारे लिये घूम रही थी,
मौला अली से किसी ने पूछा कि मेरी मां का देहांत हो गया है,
मेरे हक़ में दुआ करने वाला कोई नहीं रहा,
आपने कहा कि तुम अपनी मां की क़ब्र पर जाओ और दुआ की हाजत करो,
क्योंकि नदी जितनी भी सुख जाए,
लेकिन नमी बाक़ी रहती है,
भगवान राम ने अपनी सौतेली मां के कहने पर 14 साल के वनवास पर चले गए और इस संबंध में एक शब्द भी नहीं पूछा
आमतौर पर होता यहे है जब कोई बहुत क़ीमती चीज़ हमारे पास होती है,
तो हमको उसका एहसास. क़दर नहीं होती ,
जब वह चीज़ हमसे छिन जाये या दूर चली जाये ,
तब उसका एहसास होता है
ऐसे ही जब दुनिया से मां चली जाती है, तो हमको उसकी मोहब्बत,उसका सैक्रिफाइस उसका हमारे लिए दिया हुआ बलिदान पल पल हमें याद आता है,
हमारी आंखें हर पल मां को ढूंढती है,
तब हमको इस बात का एहसास होता है कि हमने अपनी जिंदगी की बेश क़ीमती चीज़ खो दी और हम यह सोचते हैं काश हमको इस चीज़ का एहसास मां की जिंदगी में हो जाता, जिन लोगों के ऊपर उनकी मां के आंचल का साया अभी बरक़रार है,
वह बहुत किस्मत वाले लोग हैं,अभी उनका ईश्वर अल्लाह गॉड रूठा नहीं है,
जो व्यक्ति अपनी मां की जिंदगी में उनके सैक्रिफाइस को नहीं समझा उसकी जिंदगी बेकार है
शाबू zaidi
761703276




