मुसलमानों का सबसे बड़े दुश्मन यहूदी है और कितने ही मुसलमानों को फिलिस्तीन में यहूदियों ने मार दिया और आज भी मार रहे है…, लेकिन मुसलमानों ने कभी न यहूदियों के धर्म को बुरा कहता है और न ही भगवान द्वारा भेजे गये यहूदियों के अवतारों को । इसी तरह अमेरिका मुसलमानों का दुश्मन यानि ईसाई जिसका साक्ष्य तेल को लेकर ईराक-ईरान की जंग करायी। अमेरिका ने ईराक के मुस्लिम कैदी सैनिकों को जेलों में कुत्तों से नुचवाया, अमेरिका लेडी सैनिको मुस्लिम कैदियों के साथ वहशाना सेक्स किया। लेकिन कभी मुसलमानो ने न ईसाई धर्म को बुरा कहा और नही उनके अवतारों को।
एस.एन.लाल
फिर ये भारत में ही मुसलमानों पर क्यों इल्ज़ाम लगता कि वह धर्म को बुरा कहते है या धर्म के मानने वालों को….! यही अफवाह उड़ाकर बहाना बनाकर, अन्धभक्त… मुसलमानों और उनके अवतारों को बुरा कहते है…। मुसलमानों से जय श्रीराम ज़बरदस्ती बुलवाया जाता है और न बोलने पर मॉंब लिचिंग की जाती है आखिर क्यों…।
भारत कर मुसलमान हिन्दी, संस्कृत जानता है और भारत में जन्मी भाषा उर्दू का ज्ञान रखता है..यही कारण है उसे सनातन धर्म का भी ज्ञान है, इसीलिए कभी कोई भी मुसलमान किसी धर्म को बुरा नहीं कहता….। परन्तु मुसलमान के मुॅंह में कुछ बाते ज़बरदस्ती डाल कर कहलवाई जाती है फिर उसका राजनीतिक लाभ उठाया जाता है। जबकि सिर्फ चुनाव व झगड़े के समय बने हिन्दू यानि बहुजन समाज की किताबों का उल्लेख क्यों नही किया जाता,,जहां न जाने क्या-क्या लिखा है…। लेकिन नहीं….उनकी राजनीतिक पार्टियों को ज़रुरत है।
एस.एन.लाल
आज लोग उर्दू, अरबी व फारसी नहीं जानते …तो इस्लाम को क्या समझेंगे…, दूसरे लोग क्या मुसलमान खुद आज ये तीनों भाषायें नही जानता…., इसीलिए अपने धर्म को सामने वाले को समझा नहीं पाता…। मतलब परस्त लोग अपने राजनीतिक लाभ के लिए जो इस्लाम का इतिहास बता व सुना देते है…वही आम जनता समझ लेती है।
मै ये नहीं कहता की मुसलमान राजाओं ने ज़ुल्म नहीं किये है…, अपने-अपने राजपाट को चलाने के अनुसार हर दौर में हर राजा ने ज़ुल्म हुए है..और होते है…। लेकिन उन मुस्लिम राजाओं को मुसलमान न समझकर शासक समझ कर बात की जाये…, उनके ज़ुल्म का बदला एक देहाड़ी मज़दूर, चूड़ी वाले, सब्ज़ी वाले या गोश्त ले जाने वालों नही लिया जा सकता….. अगर सनातन धर्म ये कहता है बदला लेने को…, तो ज़रुर लिजिये।
एस.एन.लाल
ये समझना ज़रुरी है कि इस्लाम, क़ुरआन व मोहम्मद साहब की शिक्षायंे अलग है…और आज 72 फिरकों में बटे मुसलमानो में सभी ने अपनी शिक्षाये बना ली है। जैसे गंगोत्री ने निकला जल कितना स्वचछ होता है लेकिन जैसे -जैसे आगे बढ़ता है, उसमें मिलावट होती जाती है। …..लेकिन स्रोत सदैव स्वच्छ रहता है उसमें मिलावट नहीं होती…। इसलिए इस्लाम, क़ुरआन व मोहम्मद साहब को बुरा कहने वाले…पहले अपने धर्म को अच्छी प्रकार समझले…तब दूसरों को बुरा कहे।
एस.एन.लाल
मनोवैज्ञानिकों द्वारा मॉब लिंचिंग का मतलब ः
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार प्रत्येक धर्म की कुछ आस्थाएं होती है, इन आस्थाओं पर चोट पहुंचाने की घटनाओं के कारर् िमॉब लिंचिंग की घटनाएं होती है । आस्थाओं पर चोट पहुंचाने की घटनाओं को कुछ गलत लोगों द्वारा अपने लाभ के लिए किया जाता है । इससे उस धर्म के लोगों का क्रोध बढ़ जाता है, फिर इस बढ़े हुए क्रोध को एक दिशा दे दी जाती है, जिससे मॉब लिंचिंग जैसी घटना घटित हो जाती है । अभी तक भारत में इस प्रकार की घटना को रोकने के लिए कोई कानून नहीं बना है, इसलिए इस पर दोषियों पर कार्यवाही भी नहीं हो पाती है ।