Home / भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के शिया विश्व विख्यात धर्मगुरू गुफरान मआब की सेवाओं को नहीं भूल सकते – मौलाना सैफ अब्बास नकवी

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के शिया विश्व विख्यात धर्मगुरू गुफरान मआब की सेवाओं को नहीं भूल सकते – मौलाना सैफ अब्बास नकवी

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लखनऊ, 3 मार्च, 2021 मुजदिदे मिलते जाफरिया, भारत की पहली मसनदे इजतेहाद, विश्व विख्यात धर्मगुरू मौलाना सैय्यद दिलदार अली नकवी ताबा सराह की मजलिस-ए-दिसा इमाम बाडा जन्नत मआब अकबरी गेट, लखनऊ, मे आयोजित किया गयी। मजलिस का उद्घाटन तिलावते कलामे पाक से कारी नासिर ने किया। शुअरा के कलाम के बाद खानदाने इज्तिहाद के धार्मिक विद्वान मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी ने ‘‘इल्म और उलेमा‘‘ के विषय पर मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि एक सच्चा धार्मिक विद्वान वह है, जिसके वचन और कर्म एक जैसा हों। अगर हम विद्वानों, के जीवन को देखें, तो निश्चित रूप से उनका पूरा जीवन अहलेबैत की शिक्षाओं के अनुसार होती है। इस संबंध में नसीरा बाद जैसी छोटी सी बसती मे रहने वाले विश्व विख्यात धर्मगुरू मौलाना ने लखनऊ के बाद इराक और ईरान में अपनी शिक्षा हसिल करने के बाद शियों के लिए जो काम किया यह उसी का नतीजा जो आज भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में परवान चढ़ रहा है। 1200 हि0 से पहले सैकड़ों वर्षों के तक शिया सूफीयत के चंगुल में फंस गए थे। लगभग 1200 हि0 से गुफरान मआब ने अपने कलम और ज़बान से शुद्ध और स्पष्ट शियत को बढ़ावा देना शुरू किया। 13 रजब 1200 हि0 को पहली नमाज़े जमाअत शुरू की गई और बर्रेसग़ीर की नमाज़े जुमा 27 वें रजब 1200 हि0 का आयोजित की गई। भारत के अन्य महान और सम्मानित विद्वानों ने अपने शिक्षक के बारे में बहुत कुछ लिखा है।
मुमताज-उल-उलेमा मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी गुफरान माब की सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अज़दारी को जिस तरीके से आयोजित किया जाता है आज पुरी दुनिया मे विशेष रूप से लखनऊ की अज़ादरी बहुत प्रसिद्ध है, क्योंकि पहले सूफी तरीके से अज़दारी मनायी जाती थी। अलम, ताज़िया जुलूस आदि के बजाय केवल झंडे होते थे, उसी तरह से विलायते मौलाए काऐनात के लिए आपकी नस्ल कोशिश करती नजर आई।
अंत में, मुमताज उलेमा मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी ने इमाम हुसैन के मसाएब को बयान किया। मजलिस मे मौलाना अफजाल हुसैन काजमी, मौलाना महफूज, मौलाना नफीस अख्तर, मौलाना रिजवान, मौलाना नाजिर, मौलाना शबी उल-हसन, मौलाना सुहैल अब्बास, मौलाना मिर्जा वाहिद हुसैन, मौलाना मजहर इमाम, मौलाना वजीर हसन, घोसी, मऊ से आए अल्लामा मोहम्मद अली के पुत्र मौलाना आसिफ सफवी, मुबारकपुर आजमगढ़ से आए खानदाने मबल्लिगे अफरिका का आलिमेदीन मौलाना मुहम्मद रजा एलिया, मौलाना कमरूल-हसन, मौलाना आसिफ सेथ्ली, मौलाना शफीक अबदी अदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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