आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दशहरे के अवसर पर अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने हिंदुओं की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं ने मिलकर प्रतिकार किया तो उन पर हमले रुक गए। हिंदुओं की इसी एकजुटता की जरूरत है, खासकर वर्तमान समय में जब देश और समाज को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
*मुख्य बिंदु:*
– *हिंदुओं की एकजुटता*: भागवत ने हिंदुओं से एकजुट होकर रहने और अपने अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दुर्बल रहना अपराध है, और हिंदू समाज को व्यवस्थित और संगठित होकर ही किसी चीज का सामना करना चाहिए।
– *बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार*: आरएसएस प्रमुख ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर चिंता जताई और कहा कि उन्हें न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया से मदद मिलनी चाहिए।
– *डीप स्टेट, वोकिज़म और कल्चरल मार्क्सिस्ट*: मोहन भागवत ने इन तीनों को सांस्कृतिक परंपराओं का शत्रु बताया और कहा कि ये समाज को तोड़ने का काम करते हैं।
– *सामाजिक सद्भाव और एकता*: उन्होंने सामाजिक सद्भाव और एकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जाति और धर्म से ऊपर उठकर व्यक्तियों और परिवारों के बीच मैत्री का होना जरूरी है।
– *देश की सुरक्षा और प्रगति*: भागवत ने देश की सुरक्षा और प्रगति के लिए नागरिकों को अपने कर्तव्यों का पालन करने और समाज की भलाई के लिए काम करने का आह्वान किया ¹ ² ³.





