कतर की राजधानी दोहा में 15 सितंबर 2025 को आयोजित हुए अरब लीग (22 सदस्य देश) और इस्लामी सहयोग संगठन (OIC, 57 सदस्य देश) के संयुक्त आपातकालीन शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य इजरायल के 9 सितंबर 2025 को दोहा में हमास के सदस्यों पर किए गए हवाई हमले की निंदा करना था। इस हमले में 5 हमास सदस्य और 1 कतरी अधिकारी मारे गए थे। सम्मेलन कतरी अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल थानी की अध्यक्षता में हुआ। यह सम्मेलन क्षेत्रीय एकजुटता का प्रतीक बना, लेकिन ठोस सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक और आर्थिक दबाव पर जोर दिया गया।
शामिल देश और नेता
सम्मेलन में लगभग 60 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें अरब लीग के सभी 22 सदस्य और OIC के अधिकांश 57 सदस्य (जैसे अफगानिस्तान, अल्बानिया, अल्जीरिया, अजरबैजान, बहरीन, बांग्लादेश, बेनिन, ब्रुनेई, बुर्किना फासो, कैमरून, चाड, कोमोरोस, कोटे डी’इवोअर, जिबूती, मिस्र, गैबॉन, गाम्बिया, गिनी, गिनी-बिसाऊ, गुयाना, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कुवैत, किर्गिस्तान, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, माली, मॉरिटानिया, मोरक्को, मोजाम्बिक, नाइजर, ओमान, पाकिस्तान, फिलिस्तीन, सऊदी अरब, सेनेगल, सिएरा लियोन, सोमालिया, सूडान, सीरिया, ताजिकिस्तान, टोगो, ट्यूनीशिया, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, युगांडा, यूएई, उज्बेकिस्तान, यमन) शामिल थे। प्रमुख नेता निम्नलिखित थे:
| देश/संगठन | प्रमुख नेता/प्रतिनिधि |
|———-|———————|
| कतर | अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल थानी |
| सऊदी अरब | क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान |
| मिस्र | राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी |
| जॉर्डन | किंग अब्दुल्ला द्वितीय |
| तुर्की | राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन |
| ईरान | राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन |
| यूएई | उप-राष्ट्रपति शेख मंसूर बिन जायद अल नाहयान |
| कुवैत | क्राउन प्रिंस शेख साबाह खालिद अल-हमद अल-सबाह |
| बहरीन | किंग का प्रतिनिधि अब्दुल्ला बिन हमद अल खलीफा |
| पाकिस्तान | प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ |
| मलेशिया | प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम |
| फिलिस्तीन | राष्ट्रपति महमूद अब्बास |
| इराक | प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी |
| सीरिया | अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शर्रा |
| OIC | महासचिव हिस्सेन ब्राहिम ताहा |
| अरब लीग | महासचिव अहमद अबुल गheit |
लिए गए निर्णय
सम्मेलन में इजरायली आक्रमण की कड़ी निंदा की गई और कतर के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त की गई। अंतिम संप्रेषण (कम्युनिके) में निम्नलिखित प्रमुख निर्णय लिए गए:
– **इजरायल पर कार्रवाई**: इजरायल के आक्रमण को “राज्य आतंकवाद” बताते हुए सभी संभव “कानूनी और प्रभावी उपाय” अपनाने का आह्वान। इसमें इजरायल के साथ राजनयिक और आर्थिक संबंधों की समीक्षा, इजरायल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करना, और UN में इजरायल की सदस्यता की समीक्षा (UN चार्टर उल्लंघन के कारण) शामिल है।
– **क्षेत्रीय सुरक्षा**: गल्फ सहयोग परिषद (GCC) ने संयुक्त रक्षा तंत्र को सक्रिय करने का वादा किया, जिसमें सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन, ओमान और कतर शामिल हैं। कतर की स्थिरता को GCC की सुरक्षा का अभिन्न अंग बताया।
– **सामान्यीकरण पर चेतावनी**: इजरायली कार्रवाइयों (जैसे गाजा में नरसंहार, विस्थापन, बस्तियां) ने अरब देशों के साथ सामान्यीकरण (नॉर्मलाइजेशन) प्रयासों को खतरे में डाल दिया है, जो अब्राहम समझौते को प्रभावित कर सकता है।
– *अन्य*: इजरायल पर आर्थिक दबाव डालने, शांति वार्ता को बाधित करने की निंदा, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दोहरी मापदंड छोड़ने का आग्रह।
फिलिस्तीन के लिए लिए गए निर्णय
फिलिस्तीन मुद्दा सम्मेलन का केंद्रीय बिंदु था। प्रमुख निर्णय:
– **दो-राज्य समाधान का समर्थन**: 4 जून 1967 की सीमाओं पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना, पूर्वी जेरूसलम को राजधानी बनाते हुए। UN महासभा के “न्यूयॉर्क घोषणा” (12 सितंबर 2025 को अपनाई गई) का समर्थन, जो फिलिस्तीन को पूर्ण UN सदस्यता और इजरायली कब्जे को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त करती है।
– **गाजा युद्ध पर**: इजरायली “नरसंहार, जातीय सफाई, भुखमरी, घेराबंदी और विस्तारवादी नीतियों” की निंदा। तत्काल युद्धविराम, मानवीय सहायता सुनिश्चित करने, और फिलिस्तीनियों के विस्थापन को रोकने का आह्वान। कतर, मिस्र और अमेरिका की मध्यस्थता प्रयासों का समर्थन, लेकिन इजरायल को वार्ता विफल करने का दोषी ठहराया।
– **अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई**: इजरायल को उसके अपराधों (जैसे 64,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत) के लिए जवाबदेह ठहराने के लिए UN सुरक्षा परिषद और महासभा में प्रस्ताव लाने का आग्रह। फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय के अधिकार को पुनःस्थापित करने पर जोर।
#### अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रों में कवरेज
अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने सम्मेलन को इजरायल-विरोधी एकजुटता का प्रतीक बताया, लेकिन ठोस कार्रवाइयों की कमी पर सवाल उठाए। प्रमुख हेडलाइंस और कवरेज:
– **बीबीसी (Qatar hosts Arab-Islamic emergency summit over Israeli strike on Doha)**: इजरायली हमले को “राज्य आतंकवाद” बताया; विश्लेषकों ने कहा कि सैन्य प्रतिक्रिया असंभव है, लेकिन कूटनीतिक दबाव बढ़ेगा।
– **अल जजीरा (Qatar hosts Arab-Islamic emergency summit: Who said what?)**: नेताओं के बयानों पर फोकस; तुर्की के एर्दोगन ने “आर्थिक दबाव” की मांग की, जॉर्डन के किंग ने “निर्णायक प्रतिक्रिया” का आह्वान किया। गाजा को “नरसंहार अभियान” कहा।
– **रॉयटर्स (Arab-Islamic summit to warn Israeli attacks threaten normalisation of ties)**: ड्राफ्ट रेजोल्यूशन का हवाला देकर सामान्यीकरण को खतरा बताया; GCC की सुरक्षा चिंताओं पर जोर।
– **द न्यूयॉर्क टाइम्स (Angered by Israel’s Attack in Qatar, Arab Leaders Meet to Weigh Response)**: नेताओं की नाराजगी पर रिपोर्ट; कहा कि कोई दंडात्मक उपाय तय नहीं हुए, लेकिन राजनयिक संबंधों की समीक्षा का आह्वान। ईरान-सऊदी एकजुटता को दुर्लभ बताया।
– **द टाइम्स ऑफ इजरायल (Arab, Muslim leaders urge review of Israel ties after attack on Hamas leaders in Doha)**: इजरायली दृष्टिकोण से कवर; नेताओं ने संबंधों की समीक्षा का आग्रह किया, लेकिन ट्रंप ने कहा कि दोहा पर दोबारा हमला नहीं होगा।
– **अरब न्यूज (Summit in Doha to discuss Arab-Islamic response to Israeli attack against Qatar)**: कतर की संप्रभुता पर फोकस; UN में फिलिस्तीनी मुद्दे पर दबाव बढ़ाने की उम्मीद।
– **हिंदुस्तान टाइम्स (Arab-Islamic summit in Qatar: Here’s a look at 57 members of Organisation of Islamic Cooperation)**: OIC सदस्यों की सूची दी; फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता पर जोर।
कुल मिलाकर, मीडिया ने सम्मेलन को “एकजुटता का प्रदर्शन” कहा, लेकिन कुछ ने इसे “कमजोर बयानबाजी” करार दिया, क्योंकि कोई तत्काल सैन्य या आर्थिक प्रतिबंध नहीं लगाए गए। यह सम्मेलन फिलिस्तीनी कारण को मजबूत करने और इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




