ईलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस अतुल श्रीधरन की एकलपीठ ने कहा कि NHRC ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया है, क्योंकि वह अदालत नहीं है और 558 मदरसों की जांच का सीधा आदेश देने का अधिकार उसके पास नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मामले केवल संवैधानिक अदालतों द्वारा ही ठीक से निपटाए जा सकते हैं।
हाईकोर्ट ने NHRC की दोहरी नीति पर भी सवाल उठाए। बेंच ने टिप्पणी की कि NHRC कुछ मामलों में तुरंत स्वतः संज्ञान ले लेता है, लेकिन मुस्लिम समुदाय पर अत्याचार, लिंचिंग या अन्य हिंसा के मामलों में चुप्पी साधे रहता है। यह टिप्पणी NHRC की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
यह फैसला मानवाधिकार संस्थाओं की भूमिका और उनकी स्वायत्तता पर बहस छेड़ सकता है, खासकर धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों में। कोर्ट ने NHRC को निर्देश दिया कि वह अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न करे और उचित प्रक्रिया अपनाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की NHRC को फटकार: मुस्लिम अत्याचार मामलों में स्वतः संज्ञान न लेने पर सवाल, मदरसों की जांच का अधिकार नहीं




