Home / धर्म चर्चा / इमाम हुसैन(अ स) की कुर्बानी को जन जन तक पहुंचाना चाहिए – मौलाना सैफ अब्बास

इमाम हुसैन(अ स) की कुर्बानी को जन जन तक पहुंचाना चाहिए – मौलाना सैफ अब्बास

Spread the love

इमामबाड़ा सय्यद तकी साहब अकबरीगेट में अशरा ए मोहर्रम की नवीं मजलिस को इंजरे नबी वा हिदायत ए वली के उनवान पर संबोधित करते हुए मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि सन 61 हिजरी में यज़ीद जो तमाम बुरी आदतों में लिप्त था उसने इमाम हुसैन(अ स) से बयत का सवाल किया क्योंकि यजीद जानता था की अगर इमाम हुसैन(अ स) जिंदा रहे तो वो जनता पर अत्याचार नहीं कर पाएगा। इसलिए यजीद चाहता था की इमाम हुसैन(अ स) को रास्ते से हटाया जाए लेकिन इमाम हुसैन(अ स) जानते थे कि अगर यजीद का साम्राज्य फैल गया तो मानवता का अंत हो जाएगा इसलिए उन्होंने यजीद के सामने सर ना झुकाया और उसको और उसके लश्कर वालों को सत्य का रास्ता दिखाने की कोशिश की। अंत में करबला का वाकिया हुआ जहां इमाम हुसैन(अ स) और उनके परिजनों को यजीद की अत्याचारी लाखों की फौज ने तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया

आज अगर दुनिया से आतंकवाद को ख़त्म करना है और मानवता के प्रति लोगों को आकर्षित करना है तो इमाम हुसैन(अ स) की शिक्षा तथा करबला की घटना को जन जन तक पहुंचाना चाहिए ताके मानवता के अंदर कुर्बानी देने का जसबा हो और हर व्यक्ति तक ये शिक्षा पहुंचे की कुर्बानी देने वाला अमर रहता है।
यह बात सच है की इमाम हुसैन(अ स) और उनके परिजन शहीद हो गए लेकिन आज भी अमर हैं । यजीद समझ रहा था की वो जीत गया लेकिन आज उसका नाम एक गाली बन गया हैं। आज पूरी दुनिया में हर धर्म एवं जाति के लोग इमाम हुसैन(अ स) की शहादत का गम मना रहे हैं क्योंकि इमाम हुसैन(अ स) ने अपनी और अपने परिजनों की कुर्बानी देकर मानवता को बचा लिया। आखिर में मौलाना ने शहज़ादे अली असगर वा इमाम हुसैन(अ स) के मसायब बयान किए जिसके बाद शबीह और ताबूत बरामद हुए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *