आज दिनांक 9 अक्टूबर, तंजीम अली कांग्रेस की एक मीटिंग हुई जिसमें देश और दुनिया के सामाजिक हालात पर चर्चा की गई. मीटिंग में अफगानिस्तान की एक मस्जिद में हुए आतंकी हमले की कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए और उसमें शहीद हुए व्यक्तियों को श्रद्धांजलि दी गई, और उनकी रूह के इसाले सवाब के लिए सूरह फातिहा की तिलावत की गई. अली कांग्रेस अध्यक्षा रुबीना रुबीना मुर्तुजा ने कहा के धर्म या अक़ीदा कि बिना पर किसी इंसान का किसी दूसरे इंसान की जान ले लेना उसके साथ इसी बिना पर जुल्म या ज़ियादती करना आतंकवाद है, और किसी पर ऐसा जुल्म और ज़ियादती होते देख खामोश रहना जुल्म और आतंकवाद को अपनी खामोश रजामंदी देना है.
मीटिंग में बड़े इमामबाड़े में नाच गाने का वीडियो वायरल जो कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर हुआ था, इस पर इजहार अफसोस करते हुए जिम्मेदारान की लापरवाही की शदीद मज़म्मत की गई, मिंबरान ने कहा है कि लखनऊ का आसिफी इमामबाड़ा जो के बड़े इमामबाड़े के नाम से जाना जाता है, एक धार्मिक स्थल है, यह अपनी भव्यता, आकर्षण और ऐतिहासिक महत्व के कारण हमारे देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर भी है परंतु क्योंकि यह एक धार्मिक स्थल है इसलिए इसकी धार्मिक मान मर्यादा का ध्यान रखा जाना अनिवार्य है.
इमामबाड़ा का निर्माण पैगंबर हजरत मोहम्मद के नाती के शहादत का मकसद आम जनमानस तक पहुंचाने और उन पर हुए जुल्म और उनके द्वारा सहे गए दुखों का वर्णन करने और उनकी याद में विशेष शोक सभाओं के आयोजन( मजलिस, मातम) के लिए किया जाता है, ऐसे स्थल पर नाच और गाना पूरी तरह वर्जित है.
पिछले दिनों जिस तरह एक युवती का इमामबाड़े मे नृत्य करते हुए वीडियो वायरल हुआ वह अत्यंत दुखद और निंदनीय है, यह इस बात का प्रमाण प्रस्तुत करता है के इमामबाड़े की मान मर्यादा और सुरक्षा के लिए इसके जिम्मेदरान द्वारा पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं, यह घटना इमामबाड़ा प्रबंधन की हद दर्जे की लापरवाही है.
इमामबाड़े के मान सम्मान के लिए उच्च स्तरीय प्रबंध कराने के दिशा निर्देश के लिए तंजीम अली कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ट्रस्ट के अधिकारियों से मिलेगा !
आखरी में जावेद मुर्तजा ताबे सराह व तंजीम अली कांग्रेस से ताल्लुक रखने वाले दीगर (जुमला)मरहूमीन के लिए सूरह फातिहा की तिलावत की गई