*सीएमएस के संस्थापक ने पी.एम. मोदी के 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की प्रशंसा की*
लखनऊ, 15 मई 2020:डॉ जगदीश गांधी, संस्थापक, सिटी मोंटेसरी स्कूल ने प्रधानमंत्री मोदी के 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की प्रशंसा की है तथा पीएम मोदी के कथन ’21वीं सदी भारत की होगी’ का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा है कि हमें गर्व है अपने यशस्वी प्रधानमंत्री पर जिन्होंने 120 से भी अधिक देशों को कोरोना के दौरान दवाएं भेज कर भारत का नाम विश्व में गौरवान्वित किया है।
डॉ जगदीश गांधी ने बताया की यह घोषणाएं देश की आर्थिक स्तिथि सुधारने में बहुत अहम् रोल अदा करेंगी। जैसे की 50,000 करोड़ रु फंड ऑफ फंड्स के माध्यम से एम.एस.एम.ई के लिए इक्क्वटी इन्फ्यज; मदर फंड और कुछ बेटी फंडों के माध्यम से संचालित किया जाएगा; यह एमएसएमई के आकार और क्षमता का विस्तार करने में मदद करेगा।
Rs 3 लाख करोड़ कोलेट्रल फ्री लोन; Rs 25 Cr तक के लोन, 100 Cr टर्न ओवर वालों को फायदा; वेतन का 24 फीसदी सरकार पीएफ में जमा करेगी और सरकार ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए 30,000 करोड़ रुपये की विशेष तरलता जैसी योजना शुरू की है।
डॉ जगदीश गांधी ने बताया की सिटी मांटेसरी स्कूल, 1959 से, यानी पिछले 61 वर्षों से, ‘जय जगत’ एवं ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को आधारशिला मान कर कार्य कर रहा है।
सीएमएस इसी विचारधारा को आगे बढ़ाने हेतु प्रतिवर्ष 20 अंतर्राष्ट्रीय शैक्षिक समाराहों का आयोजन करता आ रहा है तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 की विचारधारा पर विगत 20 वर्षों से विश्व के मुख्य न्यायाधीशों का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कराता चला आ रहा है जिसमें 136 देशों से 1300 मुख्य न्यायाधीशों एवं न्यायाधीशों ने प्रतिभाग लिया है ।
इसके साथ ही डॉ गांधी ने कहा की सिटी मोंटेसरी स्कूल माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कि इस बात का समर्थन करता है कि 21वीं सदी भारत की होगी तथा भारत की विचारधारा वसुधैव कुटुंबकम एवं जय जगत से ही विश्व का कल्याण होगा।
इसके साथ ही डॉ जगदीश गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से पत्र के माध्यम से यह अपील करी है की वह भारत के संविधान के Article 51 का अनुपालन करते हुए एक वर्ल्ड लीडर्स की ऑनलाइन मीटिंग बुला कर वर्ल्ड पार्लियामेंट का गठन करें जिससे एक नयी राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था तैयार हो ताकि संसार के 7.5 अरब लोगों का भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।