बरेली शरीफ के प्रमुख बरेलवी आलिम असजद रज़ा खान उम्रे (उमरे) को सऊदी अरब के जेद्दा में गिरफ्तार करने की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। सोशल सर्कल्स में दावा किया जा रहा है कि वे उमरा यात्रा पर गए थे और वहां भड़काऊ भाषण देकर बिदअत-रसूमात की तारीफ करने के साथ ही कई धर्मों के खिलाफ बयानबाजी की, जिसके चलते सऊदी हुकूमत ने उन्हें हिरासत में ले लिया।घटना का कथित विवरणसोशल मीडिया पोस्ट्स के मुताबिक, असजद रज़ा खान ने जेद्दा में एक मस्जिद या धार्मिक सभा में व्याख्यान दिया। इसमें उन्होंने बरेलवी अकीदे की कुछ रस्मों-रिवाजों (जैसे मिलाद, चिश्ती परंपराएं) की फजीलत बताई और कथित तौर पर दूसरे धर्मों या वहाबी विचारधारा पर टिप्पणी की। दावों के अनुसार, उन्हें लगा कि सऊदी अरब में भी भारत जैसी आजादी है, जहां बिना किसी कार्रवाई के कुछ भी बोल सकते हैं। सऊदी पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और उन्हें जेल भेज दिया। कुछ पोस्ट्स में तंज कसते हुए कहा गया कि “अरबी खून का दावा करने वाले चौथे दर्जे के कन्वर्टेड हिन्दुस्तानी मुसलमान को सऊदी ने औकात दिखाई।”धार्मिक-सामाजिक पृष्ठभूमिअसजद रज़ा खान बरेली शरीफ के पीरोजी आस्ताना से जुड़े हैं और पिता ताहिर रज़ा खान के उत्तराधिकारी माने जाते हैं। बरेलवी समुदाय में उनकी लोकप्रियता है, लेकिन सऊदी अरब जैसे वहाबी प्रभाव वाले देश में बरेलवी रस्में (जिन्हें वहां बिदअत माना जाता है) पर खुली चर्चा संवेदनशील होती है। सऊदी नियम विदेशी उलेमा के भाषणों पर सख्ती बरतते हैं, खासकर अगर वे स्थानीय अकीदे के खिलाफ हों।वर्तमान स्थिति और प्रतिक्रियाएंफिलहाल इस खबर की कोई आधिकारिक पुष्टि समाचार पत्रों या सऊदी दूतावास से नहीं हुई है। भारतीय मुस्लिम संगठन चुप्पी साधे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर बरेलवी और देहाती तबकों में बहस छिड़ी है। कुछ इसे सऊदी की सख्ती का उदाहरण बता रहे हैं, तो कुछ अफवाह करार दे रहे। खान परिवार से कोई बयान नहीं आया।संपादकीय टिप्पणी: यह खबर पूरी तरह अपुष्ट है। समाचार पत्रों को ऐसी संवेदनशील धार्मिक खबरें फैलाने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए, वरना सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। सऊदी में उमरा यात्रियों को स्थानीय कायदों का पालन करने की हिदायत दी जाती है।
सजद रज़ा खान की कथित जेद्दा गिरफ्तारी: अफवाह या हकीकत?





