बुलडोजर के शासन” (rule of the bulldozer) पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार आरोपी के खिलाफ बुलडोजर का उपयोग करते हुए खुद को “जज, जूरी और जल्लाद” (judge, jury, and executioner) एक साथ नहीं बना सकती। यह बयान संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है। CJI ने हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बुलडोजर कार्रवाई विधि के उचित प्रक्रिया (due process of law) का अवमर्दन है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, न कि त्वरित विध्वंस का सहारा लेना चाहिए। यह बयान उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में चल रही बुलडोजर कार्रवाइयों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां अवैध निर्माणों के नाम पर संपत्तियों का ध्वस्तीकरण हो रहा है। संदर्भ: यह बयान 3 अक्टूबर 2025 को दिया गया, जो हाल के सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें बुलडोजर कार्रवाई के लिए पूर्व सूचना और कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स: “Indian legal system governed by rule of law, not by rule of bulldozer: CJI B R Gavai”
@EconomicTimes
लॉ चक्रा: “CJI B R Gavai said India’s legal system is guided by the “rule of law, not the rule of the bulldozer.””
@LawChakra
एक्स पर चर्चा: उपयोगकर्ता @avesh905791
ने हिंदी में उद्धरण साझा किया – “भारत बुलडोजर की कारवाई से नहीं है, बल्कि कानून के द्वारा चलता है ~CJI B.R. Gavai”
@avesh905791




