अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी . ओल्ड ब्वायज़ एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष एस एम शोएब एवं मानद सचिव शहला हक़ ने संयुक्त वक्तव्य में कहा है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सम्बन्ध में माननीय सुप्रीम कोर्ट का आज का फ़ैसला समानता और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है। 7-न्यायाधीशों की पीठ ने एस. अज़ीज़ बाशा बनाम भारत संघ मामले में 1967 के फैसले को, यह पुष्टि करते हुए पलट दिया कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, चाहे उनकी बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक स्थिति कुछ भी हो। । यह निर्णय सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों की संविधान की गारंटी को कायम रखता है साथ ही एएमयू की अल्पसंख्यक स्थिति के समाधान का मार्ग भी प्रशस्त करता है, जिससे इसके प्रशासन और प्रबंधन पर प्रभावी असर पड़ेगा। यह फ़ैसला अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए एक मिसाल साबित होगा, जो भारत के सामाजिक न्याय और समानता विमर्श में योगदान देगा एवं एएमयू की अल्पसंख्यक स्थिति से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उम्मीद है कि आज गठित 3 जजों की बेंच का फ़ैसला एएमयू ही नहीं बल्कि देश के हित में होगा। ए.एम.यू ओल्ड ब्वायज़ एसोसिएशन लखनऊ माननीय उच्चतम न्यायालय के इस एतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए माननीय मुख्य न्यायाधीश सहित सभी सम्मानित न्यायाधीश गणों का आभार प्रकट करता है साथ ही इस सम्बन्ध में ए एम यू पक्ष के सभी अधिवक्ताओं विशेष रूप से श्री राजीव धवन, श्री कपिल सिब्बल, श्री सलमान ख़ुर्शीद आदि का कृतज्ञ है जिन्होंने प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखा।
एस एम शोएब
अध्यक्ष
एएमयू ओल्ड बॉयज़ एसोसिएशन लखनऊ





