पितृ पक्ष के आखिरी दिन सर्वपित्र अमावस्या के रूप में मनाया जाता है, जिसे पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन उन पूर्वजों की पूजा की जाती है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती है या जिनका श्राद्ध अन्य दिनों में नहीं हो पाता है ¹।
इस दिन के धार्मिक कार्यक्रमों में निम्नलिखित शामिल हैं:
तर्पण*: पूर्वजों को जल और तिल देने की प्रक्रिया, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है,
-पिंड दान*: पूर्वजों के लिए चावल और जौ के पिंड बनाकर दान देने की प्रथा है,
– *श्राद्ध कर्म*: पूर्वजों के लिए भोजन और अन्य सामग्री का दान देना,पूजा-अर्चना*: पूर्वजों की तस्वीरों या मूर्तियों की पूजा करना और उन्हें याद करना,कार्यक्रमों के माध्यम से, लोग अपने पूर्वजों को सम्मान देते हैं और उनकी आत्मा की शांति की कामना करते हैं।





