अल्लामा अक़ीलुल गरवी के संबंध में उनके,साथी,हम उम्र और उनके जान्ने वालों और आज के पढ़े लिखे- रोजगार तलाश कर रहे हैं, नौजवानों से मीर अनीस के एक मर्सिया और रांड शब्द पर की गई टिप्पणी के संबंध में बात की उनके साथियों और हम उम्र के लोगों ने कहा कि जो व्यक्ति जिस सरज़मी पर पैदा हुआ हो उसको छोड़कर दूसरे देश में बस जाए और देश, क़ौम की जिम्मेदारी जैसे शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार मोहय्या न कराए,
तो ऐसी शिक्षा किस काम की,
उनके लखनऊ के साथियों ने कहा कि जो व्यक्ति अपने उस्ताद मरहूम नक़्क़न साहब की एक किताब के विरोध के समय शाना बशाना न खड़ा हो,हाँ अलबत्ता तीजे और चलीसवें की मजलिस पड़ कर उस्ताद का हक़ अदा किया,
मेरे छोटे भाई अब्बास मुखर्जी जो इराक़ मे आयातुल्लाह सिस्तानी साहब से मिलकर आए, आज ग़रीब ज़रूरत मंद की समय और पैसे से मदद और फ्री कोचिंग सेंटर चला कर आगे बढ़ने का काम करें,उन्होंने कहा कि जनाब ग़रवी साहब को गुस्सा बहुत आता है, जो कि हराम है,
जो आलिम अपने देश की सभ्यता और क़ौम से मोहब्बत छोड़ कर चला गया हो,उससे क्या उम्मीद लगाई जा सकती है, मीर अनीस के मर्सिया का विरोध नहीं कर रहे हैं,बस इनको हिंदी और हिंदी रांड शब्द पर एहतराज़ है, हिंदुस्तान छोड़ने की वजह हिंदी ही हो,प्रोफेट मुहम्मद कह रहे हैं वतन से मोहब्बत ईमान की निशानी,
इसी संबंध में साइंस के टीचर
क़म्बर रज़ा ने बताया कि आज का ये दौर है कि जिस सब्जेक्ट में आदमी ने महारत हासिल की है, उस सब्जेक्ट को छोड़कर दूसरे सब्जेक्ट पर ख़िताबत कर रहा है,यही बात अयातुल्लाह अक़ीलुल गरवी भी कर रहे हैं,दीन का इल्म जो हासिल किया है,वो क़ौम तक पहुंचने में असमर्थ है,और ना हीं क़ौम बच्चों के लिए फ्री शिक्षा,फ्री स्वास्थ्यसेवा, रोजगार मोहय्या कराने में उनका कोई योगदान है,
डॉक्टर अहसन ऑटो ने कहा कि शैतान ने अल्लाह से कहा था कि मै तेरे नेक बंदो को भड़काऊंगा और उनका सीरतन मुस्तक़ीम के रास्ते पर बैठूंगा, आज वही हो रहा है कि मौलाना/ आयतुल्लाह/रहबर दीन की तबलीक़ के बजाय, मुसलमानो को फ़िरक़ो मे बांटने और शग़ुफ़ा छोड़ने का काम कर रहे हैं, अल्लाह इनको हिदायत देना, अमीन,
इसी संबंध में सीरिया से पढ़कर आए मौलाना से पूछा तो उन्होंने कहा कि उनकी कई मजलिस एहतराज़ जनक है, जिनमें से मुख्य दो मजलिस हैं,एक मजलिस में जनाबे मूसा नबी,अल्लाह ने जिनसे बात की,और उनको किताब दी,को कहा कि कोई ख़ास मोजीज़ा नहीं किया,इससे बड़ा मोजीज़ा ईरानी रिवॉल्यूशन के मुख्य नायक, मरहूम आयताल्लाह खुमैनी ने शाह के खिलाफ किया,
दूसरी मजलिस में आयतुल्लाह ने कहा कि इंसानों,मुसलमान तुम अली की बंदगी /आज्ञाकारी को पैदा किए गए हो,अल्लाह की “बंदगी” तुम्हारे बस में नहीं है, कुराने पाक से यह साबित है की बंदगी केवल अल्लाह की की जा सकती है,और अल्लाह खुद कुरान पाक मे इरशाद फरमाना रहा है कि हम तुमसे इस कारे रिसालत का कुछ अजर नहीं मांगता, केवल रक़बत की मोहब्बत,
लखनऊ के मशहूर शायरों से आयतुल्लाह द्वारा मीर अनीस के मर्सिया एवं रांड शब्द के एहतराज पर पूछा तो उन्होंने कहा कि मीर अनीस के मर्सिया पर आपत्ती करना ऐसा है “जैसे सूरज को चिराग दिखाना” ज़्यादातर शायरो ने यही कहा कि शायरी का भी एक फार्मूला होता है, जिसका उतार-चढ़ावो,शब्द हल्के -भारी का इस्तेमाल होता है जो शब्द मीर अनीस ने इस्तेमाल किया है,वो एकदम सही है,उसकी जगह दूसरा शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता,उन्होंने कहा कि जिनको मीर अनीस के मर्सिया पर आपत्ति है वो उस जैसा मर्सिया कह कर दिखा दे,मीर अनीस की शायरी पर आज भी पूरी दुनिया के कुछ देशों में MA और PHD की जाती है,उनके द्वारा कही गई शायरी समझना हर एक की बस की बात नहीं, अल्लाह मीर अनीस की अहलेबैत से मोहब्बत को देखते हुए जन्नत नसीब करें और आले रसूल के साथ जन्नत में उनका रखें अमीम एक सूरह फातिहा मीर अनीस के नाम
फ्रीलांसर
शाबू ज़ैदी
7617032786




