लखनऊ 8 मोहर्रम एक ग़रीब मोमिन कर्बला के शहीदों से मोहब्बत करने वाला,मंडी रोड गुफरानमाबा की मजलिस से कुरान,हदीस और सुन्नत रसूल सुनने वाला, ताकि उस पर अमल करके सीराते मुस्तक़ीम पर चलें कि आज वहीं रूह जन्नत को परवाज़ हो गई , मरना तो सबको है लेकिन तकलीफ की बात ये है कि उस मरदे मोमिन की मृत्यु को देखते हुए लगा की क्या इतने बड़े मजमें के लिए मेडिकल फैसिलिटी नहीं थी जिसकी वजह से उनको फर्स्ट ट्रेड नहीं मिल सकी, और ना ही कोई जल्द से जल्द उनको 100 कदम दूर मेडिकल कॉलेज ट्रॉमा सेंटर ले गया, जबकि इमामबाड़े में ब्लड डोनेट के कैंप और चंदा जमा करने के काउंटर और साबिले खूब लगी हैं, लेकिन आजकल की आधुनिक एंबुलेंस और मेडिकल कैंप नहीं मौजूद है, जिससे उसकी जान बचाने की कोशिश की जा सकती थी, लिखते हुए बहुत तकलीफ हो रही है लेकिन लिखना जरूरी इस वजह से है ताकि इंसानियत कायम हो और सुधार हो,शिया क़ौम के मजमे में एक भी आदमी मौजूद नहीं था जो उस मृतक व्यक्ति के मुंह व पैरों को सीधा करके पट्टी बांध सकता, ना ही उस मृतक शरीर को उठाकर कोई साफ और सुरक्षित जगह रख दिया जाता सोशल मीडिया के माध्यम से मालूम हुआ कि जिन व्यक्ति की मौत हुई है उनका नाम रईस सादिक़ है और व तालकटोरा की कर्बला मकान नंबर 11राजाजीपुरम लखनऊ में रहते हैं लेकिन अफसोस आज सोशल मीडिया पर सबसे पहले पोस्ट करने के लिए लोग जैसा कि सूत्रों ने बताया फोटो और वीडियो बना रहे थे,मै किसी पर इल्जाम नहीं लग रहा हूं, ऐसे ही लोग कर्बला में मौजूद थे, जिनको इमामे हुसैन संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि तुम्हारे मुंह में इस्लाम है और तुम्हारे पेट हराम गीजा से भरे हैं, तुमको इस्लाम समझ में नहीं आ रहा है, तुम्हारे दिलों से अल्लाह का खौफ़ ख़त्म हो गया है, अल्लाह मरने वाले को जन्नत नसीब करें,
आप सब मोमिनों से सुरह फातिहा की ईलतीजा है,
सामाजिक कार्यकर्ता
अहसन रिजवी
9335350509





