मोहतरमा रुबीना मुर्तज़ा ने तंजीम अली कांग्रेस की तरफ से बयान जारी करते हुए सभी नागरिकों से अपील की है कि वह इलेक्शन में किसी भी प्रकार के मानसिक दबाव में आए बगै़र अपनी सूझबूझ के मुताबिक़ वोट करें। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में कुछ मुस्लिम धर्म गुरुओं के ज़रिए एक कद्दावर सियासी नेता के पक्ष में वोट देने की बात कही गई है यह नागरिकों को गुमराह करने के अतिरिक्त कुछ नहीं है। ऐसे बयानों को देख और सुन के ऐसा लगता है मानो धर्मगुरु धर्म और आध्यात्म को छोड़कर, राजनीति के मैदान में जिनकी जीत सुनिश्चित है उनकी नज़रों में आने के लिए अपनी धार्मिक शिक्षा को किनारे रख कर हर तरह से प्रयत्नशील हैं ताकि चुनाव के बाद उनके उपर कृपा बनी रहे । अतः तंजीम अली कांग्रेस ऐसे धर्म गुरुओं से निवेदन करती है कि वे स्वयं जिसे चाहे वोट करें यह उनकी अपनी इच्छा और विवेक पर निर्भर करता है परंतु धर्म के नाम पर संपूर्ण समुदाय के वोटो पर अपना अधिकार जताने की कोशिश ना करें। यदि ऐसे किसी धर्मगुरु को राजनीति में हिस्सा लेना है तो वह स्वयं इलेक्शन लड़े़ और जनता से अपने लिए वोट मांगे परंतु इस तरह की सौदा बाजी न करे। लखनऊ में मोहर्रम का कोई जुलूस किसी नेता की देन नहीं है, यह केवल शिया समुदाय के संघर्ष का परिणाम है। जहां तक जुलूस में शांति व्यवस्था का सवाल है तो यह कानून व्यवस्था /लॉ एंड ऑर्डर का मसला है जिसकी जिम्मेदारी एडमिनिस्ट्रेशन की होती है, इसका इस इलेक्शन से कोई संबंध नहीं है। सत्य तो यह है के मोहर्रम और मोहर्रम के जुलूस यह अपने आप में अन्याय व अनैतिकता के खिलाफ़ संघर्ष भी है और संघर्ष का प्रतीक भी है, यह एक मिशन है एक प्रोटेस्ट है जो सामाजिक अन्याय के विरुद्ध उठ खड़े होने की शिक्षा देता है, मोहर्रम या जुलूस के नाम पर राजनीतिक लाभ की कोशिश करना इस शिक्षा के विरुद्ध है। अत: जनता को अपनी सूझबूझ के अनुसार अपने इस अधिकार का प्रयोग करने दें।
लखनऊ में मोहर्रम का कोई जुलूस किसी नेता की देन नहीं है:रुबीना मुर्तज़ा



