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उ प्र शिया-सुन्नी वक्फ की जमीन पर सरकारी क़ब्ज़े

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– जमाल मिर्ज़ा- लखनऊ ब्यूरो

सज्जाद टाइम्स न्यूज़

लखनऊ- शिया हो या सुननी दोनो वक्फ बोर्ड के ढुलमुल रवैये के चलते विभिन्न सरकारी विभाग विशेष कर लखनऊ नगर निगम वक्फ संपत्तियों पर अवैध कबज़ा करने में संलंग्न है सुननी वक्फ बोर्ड मे दुलहा चेयरमैन और उसकी चोरों की बारात अपने भ्रष्ट कूकर्मो के चलते मुंह मे दही जमाए बैठी है दूसरी ओर अनेको वक्फ संपत्तियों पर दूसरे विभाग तथा वक्फ माफिया कबजे पे कब्जा करते जा रहे है ।
लखनऊ में चालबाग स्थित मुस्लिम मुसाफिरखाने के पीछे से मुस्लिम निकाल दिया गया और सुननी वक्फ बोर्ड के महाभ्रष्ट पदाधिकारी ईडी और हथकडी के डर से बिल मे घुसे रहे ।
हरदोई मे अंजुमन ए इसलामिया की एकडो मे फैली वक्फ संपत्ति कब नरेश अग्रवाल के परिवार की हो गयी सुननी वक्फ बोर्ड को पता ही ना चला , अंधे की चौकी काकोरी के महपतमऊ मे एक परिवार के खानदानी कब्रिस्तान और उससे अटैच एकडो मे फैला एक बाग तथा पाटानाला स्थित एक हवेली पर सालो से वक्फ माफिया कबजा जमाए बैठे है किंतु सुननी वक्फ बोर्ड के चोर पदाधिकारी अपनी मुठठी गरम करते रहे ।
सुननी वक्फ बोर्ड की लगभग सभी वक्फ संपत्तियों पर वर्षो से बोर्ड पर कबजा जमाए बैठी जुफर फारूकी और उसकी चोरो की बारात की जेंबे भरकर वक्फ माफिया कबजा जमाए बैठे है जबकि इन संपत्तियों के सही संचालन से बोर्ड को इतनी आय हो सकती है कि चार पाँच सरकारी विभागों का खर्च निकाला जा सकता है तथा गंदी नाली के कीडो की तरहा पल रही मुस्लिम कौम के गरीब लोगो को उबार कर मुख्य धारा मे लाया जा सकता है ।
ठीक यही हाल शिया वक्फ बोर्ड का भी है जहाँ हमेशा से वक्फ माफियाओ की तूती बोलती आई है तथा पीछे से धर्मगुरूओं का समर्थन रहा जिसके चलते शिया वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की जम कल बंदरबाट हुई और धर्मगुरूओं ने कथित धर्मनिरपेक्ष सरकारो मे जमकर मलाई काटी खूब नौकरियां दिलवाई, ट्रासफर कराए ठेके दिलवाए आदी ।
किन्तु सूबे की सत्ता परिवर्तित होते ही सभी तथाकथित धर्मगुरूओं का महत्व समाप्त हो गया उलटा इनको अब अपनी गर्दन बचाने और जेल जाने से बचने की चिंता सताने लगी, अत अब शिया और सुननी दोनो वक्फ बोर्डों द्वारा सरकार के आगे सरेंडर कर देने जैसा प्रतीत होता है ।
क्यो कि अब तो जिसको देखो वही वक्फ संपत्तियों को लूटने मे लगा है जिसमे सरकारी विभाग भी शामिल है । दूसरी ओर अपने कृत्यों के कारण दोनों वक्फ बोर्डो के चेयरमैनो सहित किसी पदाधिकारी की इतनी औकात ही नही कि कही टांग फंसा सके क्यो की सब के सब चोर जो ठहरे ।
शिया वक्फ बोर्ड के वर्तमान चेयरमैन तथा प्रशासन के जे पी की ओर झुकाव के कारण ही नगर निगम लखनऊ भी बड़े पैमाने पर शिया वफ्फ बोर्ड़ और शिया ट्रस्ट की जमीनों पर बडे पैमाने पर कब्ज़ा कर रहा है । जहाँ नगर निगम पहले वक्फ हुसैनाबाद एव संबद्ध ट्रस्ट के हेरिटेज जोन में मन्दिर का निर्माण करवाने के कारण चर्चा मे था ही, अब हाल में ही लखनऊ नगरनिगम इसी जगह पर पार्क का निर्माण करा कर, कर रहा है कब्ज़ा ।
कुछ दिन पहले कर्बला अब्बास बाग़ की ज़मीन पर शियावक्फ बोर्ड की साठ गांठ से विधायक निधी से बनवा दी गई थी सड्क, तथा कर दिया गया था उसका उपघाटन ।
कुछ महीने पहले शाहदरेह वाली मस्जिद की कई स्क्वायर फ़ीट ज़मीन पर सरकार ने कब्ज़ा कर लिया था जिसका नही हुआ था शिया वक्फ बोर्ड की ओर से कोई विरोध ।
बदले में सरकार ने तीन चैयरमैन दे दिए इमाम ए जुमा को तथा, कई इनके साथियो को सरकार ने दे दिया बड़ा पद और कर दिया मुँह बन्द ।
जबकी उक्त सभी वक्फ संपत्तियों को वक्फ करने और वक्फ बोर्ड के अधिन करने का उद्देश्य ये था की मुस्लिम समाज के अति पिछडे लोगो को वक्फ संपत्तियों मे बसा कर अथवा वक्फ संपत्तियों की आय से अति पिछडे गरीब अशिक्षित वर्ग को विकसित कर उनको भी समाज की मुख्यधारा से जोडना था ।
इसी उद्देश्य से मुस्लिम समाज के पहले के नवाबो जागीरदारों तथा पैसे वाले लोगो ने अपनी संपत्तियों को वक्फ किया था ।
किंतु हो रहा है उल्टा ।
इन वक्फ संपत्तियों को तथाकथित धर्मगुरूओं की साठगांठ से वक्फ बोर्डो मे अपने मोहरे सेट कर वक्फ माफिया वक्फ संपत्तियों की बंदरबाट करते रहे, और अड सरकारी अमले भी इस लूट खसोट मे शामिल हो गये है लखनऊ नगर निगम सबसे ताजा वक्फ माफिया बन कर उभरा है ।
दूसरी ओर इन संपत्तियों की वास्तविक हकदार मुस्लिम समाज के अति पिछडे गरीब अशिक्षित वर्ग के लोग इस स्तर पर पहुंच गए कि समाज के लिए अभिशाप बन बये, इनकी इस दुर्गती के लिए सीधे तौर पर शिया और सुननी दोनो वक्फ वहा जमी महाभ्रष्ट चोरो की बारात रूपी प्रशासन, बडी बडी आय वाली वक्फ संपत्तियों पर कबजा जमाए बैठे तथाकथित धर्मगुरू तथा वक्फ माफिया जिममे दार है

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